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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 48वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब विभीषणजी ने भगवान् को बताया की भगवन कुशल तो तब हो होता है जब आपकी कृपा किसी निर्मल भक्त तो मिल जाती है। तब प्रभु श्री राम बोले की हमारी कृपा किसी को भी प्राप्त हो सकती है, बशर्ते वो अपने मन के विकारों को किनारे कर ह्रदय से हमारी शरण में आ जाये। अपने मन के अनेकानेक ममता के तार बटोर के एक रस्सी बनाये और उससे अपने मन को हमारे चरणों के साथ बांध दे। वो सबके प्रति सम बुद्धि रखे और हर्ष-विशाद से दूर रहे - उसे हमारी कृपा शीघ्र मिल जाती है।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 48वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब विभीषणजी ने भगवान् को बताया की भगवन कुशल तो तब हो होता है जब आपकी कृपा किसी निर्मल भक्त तो मिल जाती है। तब प्रभु श्री राम बोले की हमारी कृपा किसी को भी प्राप्त हो सकती है, बशर्ते वो अपने मन के विकारों को किनारे कर ह्रदय से हमारी शरण में आ जाये। अपने मन के अनेकानेक ममता के तार बटोर के एक रस्सी बनाये और उससे अपने मन को हमारे चरणों के साथ बांध दे। वो सबके प्रति सम बुद्धि रखे और हर्ष-विशाद से दूर रहे - उसे हमारी कृपा शीघ्र मिल जाती है।