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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 49वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब रामजी ने बताया की कौन भक्तजन हमको प्रिय होते हैं और कब हमारी कृपा उनको प्राप्त होती है, फिर आगे भगवान् कहते हैं की 'हे विभीषण, तुम्हारे अंदर तो वो सब गुण हैं, इसीलिए वे भगवान् को अत्यंत प्रिय हैं। वभीषणजी कहते हैं के हे प्रभु, आपके दर्शन से पहले हमारे मन में कुछ वासनाएं थीं लेकिन आपके दर्शन और आपके प्रेम रुपी सरिता में वे सब बह गईं, अब प्रभु कृपया हमें अपनी वो पावनि भक्ति हमें दीजिये जिसे शिवजी अपने ह्रदय में रखते हैं। भगवान् ने एवमस्तु कहा - और विभीषणजी अत्यंत धन्य हो गए। फिर रामजी ने समुद्र का जल मंगवाया और उनका राज्य-तिलक कर दिया। देवता लोग भी धन्य हो गए और आकाश से पुष्प-वृष्टि होने लगी।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 49वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब रामजी ने बताया की कौन भक्तजन हमको प्रिय होते हैं और कब हमारी कृपा उनको प्राप्त होती है, फिर आगे भगवान् कहते हैं की 'हे विभीषण, तुम्हारे अंदर तो वो सब गुण हैं, इसीलिए वे भगवान् को अत्यंत प्रिय हैं। वभीषणजी कहते हैं के हे प्रभु, आपके दर्शन से पहले हमारे मन में कुछ वासनाएं थीं लेकिन आपके दर्शन और आपके प्रेम रुपी सरिता में वे सब बह गईं, अब प्रभु कृपया हमें अपनी वो पावनि भक्ति हमें दीजिये जिसे शिवजी अपने ह्रदय में रखते हैं। भगवान् ने एवमस्तु कहा - और विभीषणजी अत्यंत धन्य हो गए। फिर रामजी ने समुद्र का जल मंगवाया और उनका राज्य-तिलक कर दिया। देवता लोग भी धन्य हो गए और आकाश से पुष्प-वृष्टि होने लगी।