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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 53वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब रावण का दूत रामजी के गुणों का मन ही मन गाने से प्रभावित हुआ, तो उसका कपट से धारण किया हुआ रूप समाप्त हो गया और वो अपने वास्तविक रूप में आ गया - और पकड़ा गया। उसकी बहुत पिटाई हुई और सुग्रीव ने तो उसके नाक-कान काटने का निर्णय किया। उसके बहुत रोने-चिल्लाने और अंत में रामजी की दुहाई देने पर लक्ष्मणजी ने सुना तो उसे अपने पास बुलवाया, और अंत में उसे ही अपना दूत बनाकर रावण को मौखिक सन्देश और लिखित पत्र भिजवाया। वो रामजी और लक्ष्मणजी के गुणों का स्मरण करती हुए लंका वापस आ गया। रावण के पास गया तो उसने वहां के सब हाल-चाल पूछे।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 53वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब रावण का दूत रामजी के गुणों का मन ही मन गाने से प्रभावित हुआ, तो उसका कपट से धारण किया हुआ रूप समाप्त हो गया और वो अपने वास्तविक रूप में आ गया - और पकड़ा गया। उसकी बहुत पिटाई हुई और सुग्रीव ने तो उसके नाक-कान काटने का निर्णय किया। उसके बहुत रोने-चिल्लाने और अंत में रामजी की दुहाई देने पर लक्ष्मणजी ने सुना तो उसे अपने पास बुलवाया, और अंत में उसे ही अपना दूत बनाकर रावण को मौखिक सन्देश और लिखित पत्र भिजवाया। वो रामजी और लक्ष्मणजी के गुणों का स्मरण करती हुए लंका वापस आ गया। रावण के पास गया तो उसने वहां के सब हाल-चाल पूछे।