
Sign up to save your podcasts
Or


सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 54वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब रावण ने अपने दूत से विभीषण एवं उस पार का सब हाल-चाल पूछा तो उसने कहा की 'हे नाथ! आपने जिस स्नेह और कृपा से हमारा हाल-चाल आदि पूछा है, हमारा निवेदन है की हमारी सब बातें आप उसी कृपा का भाव बनाए रख कर आप सुन लीजियेगा। महाराज, जब विभीषण वहां पहुंचा तो रामजी ने उसी समय उसका राज-तिलक कर दिया। हमको रावण का दूत जानकार पकड़ लिया और बहुत दुःख दिया और हमारी नाक-कान कटाने लगे। जब रामजी की दुहाई दी तब ही छोड़ा। उनकी वानरों और भालुओं की सेना बहुत ही विशाल है और एक से एक बड़े-बड़े योद्धा हैं। जो वानर यहाँ आया था वो तो उनमे बहुत ही छोटा है।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 54वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब रावण ने अपने दूत से विभीषण एवं उस पार का सब हाल-चाल पूछा तो उसने कहा की 'हे नाथ! आपने जिस स्नेह और कृपा से हमारा हाल-चाल आदि पूछा है, हमारा निवेदन है की हमारी सब बातें आप उसी कृपा का भाव बनाए रख कर आप सुन लीजियेगा। महाराज, जब विभीषण वहां पहुंचा तो रामजी ने उसी समय उसका राज-तिलक कर दिया। हमको रावण का दूत जानकार पकड़ लिया और बहुत दुःख दिया और हमारी नाक-कान कटाने लगे। जब रामजी की दुहाई दी तब ही छोड़ा। उनकी वानरों और भालुओं की सेना बहुत ही विशाल है और एक से एक बड़े-बड़े योद्धा हैं। जो वानर यहाँ आया था वो तो उनमे बहुत ही छोटा है।