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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 56वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि शुक नामक दूत रावण को दूसरी तरफ के समाचार बता रहा था। उसने सब कुछ यथावत वर्णन करा। वो अंत में रामजी के सामर्थ्य का वर्णन करता है - कि वे अत्यंत तेजस्वी, बलवान एवं बुद्धिमान दिखते हैं। यद्यपि वे अपने एक बाण से सैकड़ों समुद्रों को सुखा देने में सक्षम हैं, तथापि वे अत्यंत विनम्र और शालीन दिखते हैं। आपके भाई ने उन्हें समुद्र से ही प्रर्थना पूर्वक मार्ग दिखने के लिए बोला तो वे वैसा ही कर रहे हैं। यह सुनकर रावण जोर से हँसा और बोल की - बस, ज्यादा तारीफ़ मत कर, मैंने उनकी बुद्धि और बल को भांप लिया है। जिसका डरपोक विभीषण जैसा सचिव हो वो क्या विजय प्राप्त करेगा। फिर शुक ने लक्षण जी द्वारा भेजी गयी पत्री दी जिसे उसने किसी से पढ़वाया। उसमे क्या था ये सब आप प्रवचन में सुनिए।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 56वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि शुक नामक दूत रावण को दूसरी तरफ के समाचार बता रहा था। उसने सब कुछ यथावत वर्णन करा। वो अंत में रामजी के सामर्थ्य का वर्णन करता है - कि वे अत्यंत तेजस्वी, बलवान एवं बुद्धिमान दिखते हैं। यद्यपि वे अपने एक बाण से सैकड़ों समुद्रों को सुखा देने में सक्षम हैं, तथापि वे अत्यंत विनम्र और शालीन दिखते हैं। आपके भाई ने उन्हें समुद्र से ही प्रर्थना पूर्वक मार्ग दिखने के लिए बोला तो वे वैसा ही कर रहे हैं। यह सुनकर रावण जोर से हँसा और बोल की - बस, ज्यादा तारीफ़ मत कर, मैंने उनकी बुद्धि और बल को भांप लिया है। जिसका डरपोक विभीषण जैसा सचिव हो वो क्या विजय प्राप्त करेगा। फिर शुक ने लक्षण जी द्वारा भेजी गयी पत्री दी जिसे उसने किसी से पढ़वाया। उसमे क्या था ये सब आप प्रवचन में सुनिए।