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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 59वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब भगवन राम सौदर्य देवता पर क्रोधित और अपना धनुष बाण उठाया तब वे प्रकट हुए, और भगवान् के चरण पकड़ लिए और बोले - कि हे प्रभु हमें क्षमा करें, हम सभी पंच महाभूत के देवता स्वाभाविक रूप से जड़ होते हैं क्यूंकि ये महाभूत ही जड़ होते हैं। जड़ता के कारण केवल ताडन की भाषा ही समझ में आती है। लेकिन प्रभु हम आप की ही बनाई सृष्टि की मर्यादा का पालन कर रहे हैं। आप चाहें तो समुद्र को सुखा दीजिये और सभी जीव-जंतुओं को समाप्त कर दीजिये - आप की इच्छा। लेकिन इसमें आप के द्वारा बनाई गई समुद्र की मर्यादा कुछ नहीं रह पायेगी। आप की जैसी आज्ञा हो आप बताइये। भगवान् उनकी विनम्रता और विचार देख कर प्रसन्न हुए और मुस्कराये। फिर सौदर्य देवता से ही पुछा की आप ही हमें बतायें की हमारी वानर सेना उस पार कैसे जाए।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 59वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब भगवन राम सौदर्य देवता पर क्रोधित और अपना धनुष बाण उठाया तब वे प्रकट हुए, और भगवान् के चरण पकड़ लिए और बोले - कि हे प्रभु हमें क्षमा करें, हम सभी पंच महाभूत के देवता स्वाभाविक रूप से जड़ होते हैं क्यूंकि ये महाभूत ही जड़ होते हैं। जड़ता के कारण केवल ताडन की भाषा ही समझ में आती है। लेकिन प्रभु हम आप की ही बनाई सृष्टि की मर्यादा का पालन कर रहे हैं। आप चाहें तो समुद्र को सुखा दीजिये और सभी जीव-जंतुओं को समाप्त कर दीजिये - आप की इच्छा। लेकिन इसमें आप के द्वारा बनाई गई समुद्र की मर्यादा कुछ नहीं रह पायेगी। आप की जैसी आज्ञा हो आप बताइये। भगवान् उनकी विनम्रता और विचार देख कर प्रसन्न हुए और मुस्कराये। फिर सौदर्य देवता से ही पुछा की आप ही हमें बतायें की हमारी वानर सेना उस पार कैसे जाए।