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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 60वें अर्थात अंतिम दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब समुद्र देवता प्रकट हुए तो उन्होंने राम जी से क्षमा मांगी और कहा की महाराज हम सहज रूप से जड़ हैं, आप ने उचित ही किया जो हमें अपना गुस्सा दिखाया। रामजी उनकी विनम्रता से प्रसन्न हो गए और पुछा की ठीक है अब बताओ ही हम कैसे उस पार जाएं। तो उन्होंने ने बताया की महाराज, आप की वानर सेना में नल और नील नाम की दो वानर हैं जिनके पास यह आशीर्वाद है की वे जिस पत्थर अथवा पहाड़ को स्पर्श कर देंगे वो तैरने लगेगा। बस आप उनको काम में लगा दें पुल बनजायेगा, हम भी यथा संभव मदद करेंगे।
इस तरह से सुन्दरकाण्ड का समापन हो गया. गोस्वामीजी कहते हैं की जो कोई भी रामजी का यह गुणों का स्मरण और भजन करेगा वो बिना प्रयास भाव सागर से बिना किसी नौका के तर जायेगा। इसके साथ ही यह ६० दिवसीय सुंदरकांड ज्ञान यज्ञ का भी अत्यंत सुखपूर्वक समापन हो गया। जय श्री राम।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के 60वें अर्थात अंतिम दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने बताया कि जब समुद्र देवता प्रकट हुए तो उन्होंने राम जी से क्षमा मांगी और कहा की महाराज हम सहज रूप से जड़ हैं, आप ने उचित ही किया जो हमें अपना गुस्सा दिखाया। रामजी उनकी विनम्रता से प्रसन्न हो गए और पुछा की ठीक है अब बताओ ही हम कैसे उस पार जाएं। तो उन्होंने ने बताया की महाराज, आप की वानर सेना में नल और नील नाम की दो वानर हैं जिनके पास यह आशीर्वाद है की वे जिस पत्थर अथवा पहाड़ को स्पर्श कर देंगे वो तैरने लगेगा। बस आप उनको काम में लगा दें पुल बनजायेगा, हम भी यथा संभव मदद करेंगे।
इस तरह से सुन्दरकाण्ड का समापन हो गया. गोस्वामीजी कहते हैं की जो कोई भी रामजी का यह गुणों का स्मरण और भजन करेगा वो बिना प्रयास भाव सागर से बिना किसी नौका के तर जायेगा। इसके साथ ही यह ६० दिवसीय सुंदरकांड ज्ञान यज्ञ का भी अत्यंत सुखपूर्वक समापन हो गया। जय श्री राम।