
Sign up to save your podcasts
Or


सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के ८वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में बताया की देवता कौन होते हैं जो अनेकों आशीर्वाद के साथ-साथ सुरसा जैसी आपदा भेजते रहते हैं। हुमान्जी की आगे की यात्रा में एक और विचित्र आपदा आती है - वो थी सिंहिका राक्षसी। उसकी विचित्रता इस बात की थी की वो आकाश में उड़ते किसी भी प्राणी की जल के ऊपर परछाईं को पकड़ कर उसको उड़ने में असमर्थ कर देती थी और निचे गिराकर उसको खा लेती थी। यह ही उसने हनुमानजी के साथ किया। हनुमानजी समझ गए और ऐसी नीच शक्ति का संहार करना ही उचित समझा। इसके बाद वे लंका पहुँच जाते हैं। जिसका प्रथम दर्शन बहुत ही सुंदरता का था।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के ८वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा में बताया की देवता कौन होते हैं जो अनेकों आशीर्वाद के साथ-साथ सुरसा जैसी आपदा भेजते रहते हैं। हुमान्जी की आगे की यात्रा में एक और विचित्र आपदा आती है - वो थी सिंहिका राक्षसी। उसकी विचित्रता इस बात की थी की वो आकाश में उड़ते किसी भी प्राणी की जल के ऊपर परछाईं को पकड़ कर उसको उड़ने में असमर्थ कर देती थी और निचे गिराकर उसको खा लेती थी। यह ही उसने हनुमानजी के साथ किया। हनुमानजी समझ गए और ऐसी नीच शक्ति का संहार करना ही उचित समझा। इसके बाद वे लंका पहुँच जाते हैं। जिसका प्रथम दर्शन बहुत ही सुंदरता का था।