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सुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के ९वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा को आगे ले जाते हुए बताया की जब हनुमान जी लंका पहुंचते हैं तो उन्होंने लंका का अत्यंत सुन्दर दृश्य देखा। प्रारम्भ में प्राकृतिक सुंदरता का दृश्य - पेड़, फल, फूल उनपे मंडराते हुए भवरें, पहाड़ की तलेटी में बसा हुआ अत्यंत सुरक्षित, सुसज्जित एवं समृद्ध नगर। नगर के अनेकानेक लोग आदि आदि। यहाँ पर पूज्य स्वामीजी ने मनुष्य की संवेदनशीलता के ऊपर विशेष चर्चा करी। संवेदनशीलता जागृति का पर्याय होती है। जो ईश्वर रचित सृष्टि को ठीक से नहीं देख सकता है वो वस्तुतः अभी ईश्वर से प्रेम नहीं रखता है और इसीलिए वो ईश्वर को भी नहीं देख सकता है। अतः हनुमानजी से संवेदनशीलता की शिक्षा अवश्य लेनी चाहिए।
By Vedanta Ashramसुन्दरकाण्ड ज्ञान यज्ञ के ९वें दिन पूज्य स्वामी आत्मानन्द सरस्वती जी महाराज ने सुंदरकांड की कथा को आगे ले जाते हुए बताया की जब हनुमान जी लंका पहुंचते हैं तो उन्होंने लंका का अत्यंत सुन्दर दृश्य देखा। प्रारम्भ में प्राकृतिक सुंदरता का दृश्य - पेड़, फल, फूल उनपे मंडराते हुए भवरें, पहाड़ की तलेटी में बसा हुआ अत्यंत सुरक्षित, सुसज्जित एवं समृद्ध नगर। नगर के अनेकानेक लोग आदि आदि। यहाँ पर पूज्य स्वामीजी ने मनुष्य की संवेदनशीलता के ऊपर विशेष चर्चा करी। संवेदनशीलता जागृति का पर्याय होती है। जो ईश्वर रचित सृष्टि को ठीक से नहीं देख सकता है वो वस्तुतः अभी ईश्वर से प्रेम नहीं रखता है और इसीलिए वो ईश्वर को भी नहीं देख सकता है। अतः हनुमानजी से संवेदनशीलता की शिक्षा अवश्य लेनी चाहिए।