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अवधुतोपाख्यान, अजगर से लेकर पिङ्गला तक नौ गुरूओं की कथा।
अवधुतोपाख्यान, एक से आठ तक, पृथ्वी से कबुतर तक।
देवताओ की भगवान् से स्वधाम सिधारने के लिये प्रार्थना।
भक्तिहीन पुरूषो की गति और भगवान् की पूजाविधी का वर्णन।
माया, माया से पार होने के उपाय, तथा ब्रह्म और कर्म योग का निरूपण।
यदुवंश को ऋषियों का शाप,नारद जी का वसुदेव जी को राजा जनक और नौ योगीश्वरों का संवाद सुनाना।
भृगु जी द्वारा त्रिदेवो की परिक्षा, तथा भगवान् का मरे हुये ब्राह्मण बालकों को वापस लाना।
अध्याय ८७ श्लोक सॅख्या ४१ से आगे का हिन्दी भावार्थ और "शिवजी का संकट मोचन। " नामक ८८ वाॅ अध्याय का भावार्थ सहित पाठ।
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