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संग-ए-मर मर सा वो बदन
खिलते होंठों का वो चमन
आँखों में था तेरी सुरूर
मुझको था तुझपे गुरूर
इश्क़ का तेरे फितूर
वो तेरी बातों का ख्याल
वो तेरे चेहरे का नूर
वो तेरे आगोश की गर्मी
इश्क़ का तेरे फितूर
By Dr. Rajnish Kaushikसंग-ए-मर मर सा वो बदन
खिलते होंठों का वो चमन
आँखों में था तेरी सुरूर
मुझको था तुझपे गुरूर
इश्क़ का तेरे फितूर
वो तेरी बातों का ख्याल
वो तेरे चेहरे का नूर
वो तेरे आगोश की गर्मी
इश्क़ का तेरे फितूर