रेखा का पूरा नाम भानु रेखा गणेशन है. साउथ की फिल्मों में छोटा मोटा रोल करने के दौरान रेखा को 14 साल की उम्र में बंबई आने का मौका मिला. निर्देशक कुलजीत ने रेखा को 5 साल के लिए साइन किया था.
Rajesh Khanna और Sharmila Tagore की फिल्म आराधना के बनने की कहानी. एक छोटी सी क्विकी फिल्म आराधना कैसे बन गई राजेश खन्ना की सुपरहिट फिल्म. सुनिए आराधना के बनने की कहानी
Actor Raaj Kumar Unknown Facts: राज कुमार हिंदी सिनेमा के सबसे नकचढ़े एक्टर्स में से एक माने जाते थे. यही वजह थी कि इंडस्ट्री में उनके दोस्त भी नहीं थे. उनके गिने चुने दोस्तों में जुबली कुमार यानी राजेंद्र कुमार शामिल थे. स्टारडम का दूसरा नाम माने जाने वाले राज कुमार की जिंदगी में एक दौर ऐसा भी आया, जब उनके पास कोई काम नहीं था. उन्होंने राजेंद्र कुमार से काम दिलाने की गुजारिश की. तब जुबली कुमार ने उनके लिए नर्गिस से झगड़ा तक कर लिया.
राजेश खन्ना ने फिल्म इंडस्ट्री में फिल्म आखिरी खत से कदम रखा था. फिर राज़, औरत, बहारों के सपने में भी काका नज़र आए लेकिन ये सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ गईं. लगातार फ्लॉप फिल्मों ने काका को बेचैन कर दिया
Famous Actor Anwar Hussain's Life Story: अगर आपको पुराने दौर की फिल्में देखना पसंद है तो आप अनवर हुसैन के नाम से जरूर वाकिफ होंगे. अनवर हुसैन ने पर्दे पर कई नेगेटिव किरदार निभाए हैं, लेकिन असल जिंदगी में वे काफी खुशमिजाज किस्म के इंसान थे.
राजेश खन्ना और डिंपल कपाड़िया की पहली बार खुलकर मुलाकात फ्लाइट में हुई थी. दोनों अहमदाबाद एक अवॉर्ड फंक्शन में जा रहे थे. फिर इसके बाद डिंपल ने काका को बहुत बार फोन किया और एक दिन पिता चुन्नीभाई कपाड़िया के साथ आशीर्वाद आ पहुंचीं.
साल 1972 में राजेश खन्ना की एक और फिल्म आई अमर प्रेम जिसने कामयाबी के झंडे गाड़ दिए. अमर प्रेम बंगाली फिल्म निशिपद्मा की हिन्दी रिमेक थी जिसके लिए काका ने खूब मेहनत की. लेकिन काका से पहले इस फिल्म के लिए राज कुमार से बात हुई थी.
इसमें कोई दो राय नहीं है कि जया भादुड़ी उर्फ़ जया बच्चन हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में अमिताभ बच्चन की सीनियर हैं. जया ने अमिताभ बच्चन से पहले कामयाबी हासिल की. अमिताभ बच्चन को फिल्म शोले मिलने का किस्सा भी बहुत दिलचस्प है और सबसे दिलचस्प बात ये है कि जया ने जो कहा वो सच साबित हुआ.
बीआर चोपड़ा (BR Chopra) ने हमेशा सार्थक विषयों पर फिल्में बनाई हैं. उन्होंने जब अपने प्रोडक्शन हाउस बीआर फिल्म्स की स्थापना की तो पहली फिल्म ‘एक ही रास्ता’ बनाई जो सुपरहिट रही. फिर बनाई ‘नया दौर’ (Naya Daur) जो मेकिंग के समय विवादों में रही. इस फिल्म में तांगेवाले का रोल करने के लिए दिलीप कुमार (Dilip Kumar) तैयार ही नहीं थे.
साल 1969 में आई शक्ति सामंत की फिल्म आराधना पूरी तरह से शर्मिला टैगोर की फिल्म मानी जा रही थी लेकिन अचानक से इस फिल्म का पूरा क्रेडिट राजेश खन्ना ले उड़े. सुनिए फिल्म आराधना की रिलीज़ के दिन का किस्सा. Rajesh Khanna Sharmila Tagore Farida Jalal
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