उन दिनों अपने बंगले आशीर्वाद की छत से राजेश खन्ना घंटों तक समंदर की उठती लहरों को देखा करते थे. ये वो दौर था जब सैकड़ों मिलने वालों का डेरा हमेशा काका के घर में लगा रहता था. उन्हीं दिनों काका के चाहने वाले उन्हें ढेरों खत भेजा करते थे, जिसमें रोज़ कुछ खत खून से लिखे होते थे. जिसका बराबर जवाब राजेश खन्ना देते थे.