कभी किसी घनी रात में बिछी हुई सितारों की चादर को देखा है?
कितना खूबसूरत, जगमाता सा समा बांध देती है ना?
बस लगता है कुछ पल के लिए सब थम जाए और बस उस नज़ारे को जी भर के नज़रबंद कर लें।
पर उससे भी ज़्यादा बेमिसाल पता है क्या है?
उस तारों के भीड़ में से एक टूटता तारा;
जिसे देख कर आंखें खुद बंद होके दुआ मांगने लग जाती,
जो खुद टूट के हमे इक उम्मीद से जोड़ देता की शायद दिल में बसी ख्वाहिश मुकम्मल होजाये।
मैने उसी टूटते तारे से सीखा है कि कभी कभी जब आप टूटते हो तो कहीं न कहीं आप और अहम होजते हो।
– swapnil