कहानी उस दौर की है जब दलितों के लिए किसी जल स्रोत से पानी भरना भी मुहाल था। अपने बीमार पति के लिए गंगी ने डरते हुये, चुपके से ठाकुर के कुआं से पानी भरना चाहा मगर अचानक ठाकुर ने उसे देख लिया। मजबूरन जोखु को गंदा बदबूदार पानी ही पीना पड़ा। एक जगह प्रेमचंद लिखते हैं कि गंगी चाहती तो उस गन्दे पानी को उबाल कर बीमार जोखु को पिला सकती थी। मगर स्वच्छ जल के लिए जोखिम उठाना ही उचित समझा। और शायद यही लाइन इस कहानी मुख्य आधार बिंदु है।