
Sign up to save your podcasts
Or


तुम्हारी जेब में एक सूरज होता था । अजेय
तुम्हारी जेबों में टटोलने हैं मुझे
दुनिया के तमाम ख़ज़ाने
सूखी हुई ख़ुबानियाँ
भुने हुए जौ के दाने
काठ की एक चपटी कंघी और सीप की फुलियाँ
सूँघ सकता हूँ गंध एक सस्ते साबुन की
आज भी
मैं तुम्हारी छाती से चिपका
तुम्हारी देह को तापता एक छोटा बच्चा हूँ माँ
मुझे जल्दी से बड़ा हो जाने दे
मुझे कहना है धन्यवाद
एक दुबली लड़की की कातर आँखों को
मूँगफलियाँ छीलती गिलहरी की
नन्ही पिलपिली उँगलियों को
दो-दो हाथ करने हैं मुझे
नदी की एक वनैली लहर से
आँख से आँख मिलानी है
हवा के एक शैतान झोंके से
मुझे तुम्हारी सबसे भीतर वाली जेब से
चुराना है एक दहकता सूरज
और भाग कर गुम हो जाना है
तुम्हारी अँधेरी दुनिया में एक फ़रिश्ते की तरह
जहाँ औंधे मुँह बेसुध पड़ी हैं
तुम्हारी अनगिनत सखियाँ
मेरे बेशुमार दोस्त खड़े हैं हाथ फैलाए
कोई ख़बर नहीं जिनको
कि कौन-सा पहर अभी चल रहा है
और कौन गुज़र गया है अभी-अभी
सौंपना है माँ
उन्हें उनका अपना सपना
लौटाना है उन्हें उनकी गुलाबी अमानत
सहेज कर रखा हुआ है
जो तुमने बड़ी हिफ़ाज़त से
अपनी सबसे भीतर वाली जेब में!
By Nayi Dhara Radioतुम्हारी जेब में एक सूरज होता था । अजेय
तुम्हारी जेबों में टटोलने हैं मुझे
दुनिया के तमाम ख़ज़ाने
सूखी हुई ख़ुबानियाँ
भुने हुए जौ के दाने
काठ की एक चपटी कंघी और सीप की फुलियाँ
सूँघ सकता हूँ गंध एक सस्ते साबुन की
आज भी
मैं तुम्हारी छाती से चिपका
तुम्हारी देह को तापता एक छोटा बच्चा हूँ माँ
मुझे जल्दी से बड़ा हो जाने दे
मुझे कहना है धन्यवाद
एक दुबली लड़की की कातर आँखों को
मूँगफलियाँ छीलती गिलहरी की
नन्ही पिलपिली उँगलियों को
दो-दो हाथ करने हैं मुझे
नदी की एक वनैली लहर से
आँख से आँख मिलानी है
हवा के एक शैतान झोंके से
मुझे तुम्हारी सबसे भीतर वाली जेब से
चुराना है एक दहकता सूरज
और भाग कर गुम हो जाना है
तुम्हारी अँधेरी दुनिया में एक फ़रिश्ते की तरह
जहाँ औंधे मुँह बेसुध पड़ी हैं
तुम्हारी अनगिनत सखियाँ
मेरे बेशुमार दोस्त खड़े हैं हाथ फैलाए
कोई ख़बर नहीं जिनको
कि कौन-सा पहर अभी चल रहा है
और कौन गुज़र गया है अभी-अभी
सौंपना है माँ
उन्हें उनका अपना सपना
लौटाना है उन्हें उनकी गुलाबी अमानत
सहेज कर रखा हुआ है
जो तुमने बड़ी हिफ़ाज़त से
अपनी सबसे भीतर वाली जेब में!