Pratidin Ek Kavita

Unghta Santri | Vishwanath Prasad Tiwari


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ऊँघता संतरी।  विश्वनाथ प्रसाद तिवारी


उसे मत जगाओ

वह सपने देख रहा है

बच्चे लौट रहे हैं उसके सपने में

पक्षी चहचहा रहे हैं उसके सपने में

बदल रहे हैं इंद्रधनुष के रंग उसके सपने में

झर रहे हैं गुलमुहर के फूल उसके सपने में

उसे मत जगाओ

उसकी नींद पर पाबंदी है

अभी एक झपकी में वह लूट लेगा ब्रहमांड

अभी एक हलका-सा पदचाप

चकनाचूर कर देगा उसका शीशमहल

देवदूत की तरह सो रहा है वह

उसे मत जगाओ

अभी वह उछलकर खड़ा हो जाएगा

सीधे तने वृक्ष की तरह

सजग और तैयार

किसी पर भी गोली चला देने के लिए।


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Pratidin Ek KavitaBy Nayi Dhara Radio