लेखिका ने इस कहानी में गजाधर बाबू के रूप में नौकरी से सेवानिवृत्त हो कर घर लौटे पुरुष मन की व्यथा का चित्रण किया है। परिवार से जुड़ कर जीने की इच्छा को मन में लिए ,घर लौटे तो हैं फिर भी परिवार के बीच अकेले जीने पर विवश हैं । मजबूरी में उन्हें दूसरी नौकरी के लिए जाना पड़ा |