भगवान के दर्शन में तल्लीन हो जाते है, पर दुनियादारी में लगते ही सब भूल जाते है? (श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदासजी महाराज के साथ विभिन्न विषयक प्रश्नोत्तर)
सब कर्मों का अंत होने पर मनुष्य जन्म मिलता है, फिर मनुष्य शरीर में दुःख क्यों? (श्रद्धेय स्वामी जी श्री रामसुखदासजी महाराज के साथ विभिन्न विषयक प्रश्नोत्तर)