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शायद प्रेम और वियोग, दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। जब तक हम किसी के क़रीब होते हैं तो हमें उसकी एहमियत का आभास नहीं हो पाता। और जैसे ही उस व्यक्ति का, उस स्थिति का या उस भाव का अभाव हमारे सामने आता है, तो हम स्तब्ध रह जाते हैं और उस खालीपन से पहला साक्षात्कार होता है।
By Nakshatra Pandeyशायद प्रेम और वियोग, दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। जब तक हम किसी के क़रीब होते हैं तो हमें उसकी एहमियत का आभास नहीं हो पाता। और जैसे ही उस व्यक्ति का, उस स्थिति का या उस भाव का अभाव हमारे सामने आता है, तो हम स्तब्ध रह जाते हैं और उस खालीपन से पहला साक्षात्कार होता है।