Gurudev Ojaswi Sharma Ji

"विवेक"


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* अंतरात्मा की आवाज विवेक के रूप में प्रकट होती है


* अच्छाई का अभिमान सारी बुराइयों की जड़ है


* दो बातों पर पूरा जीवन मिला हुआ प्रारंभ और उस पारीस्थिति का सदुपयोग या दुरुपयोग


* ज्यादा गड़बड़ तब होती है जब बुराई अच्छाई का चोला पहनके आती है

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Gurudev Ojaswi Sharma JiBy Seeker_Who Am I