* जो सदा से हैं, सब जगह हैं, सबके हैं, सब में है, उनका अनुभव क्यों नहीं हो रहा
* जब तक उनका अनुभव नहीं होगा , चैन मिलेगा नहीं
* सभी अधिकतर परिस्थिति को सुधारने में लगे हुए है, यह एक बड़ी भूल है
* परिस्थिति वश में नहीं होती, मन - स्थिति हो सकती है
* " तू हे, तू मेरा है, सर्वशक्तिशाली है, मुझ पर कृपंकर दे " प्रार्थना करो !
* कृपा तो हर समय हो ही रही है, उस पर दृष्टि नहीं जा रही
* ज्योतिषियों के पास बिल्कुल मत जाना
* दूसरों के दोष देखना बंद करदो,
केवल अपने दोष देखो, दूसरों के गुण
* बिना जाने भगवान से प्रेम करने लग जाओ