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16 दिसंबर 1971, सुबह 10 बजकर 15 मिनट का वक़्त। 21 साल के सेकेंड लेफ़्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के टैंक ने दुश्मन के चार टैंक तबाह कर दिए थे। अरुण अपना रेडियो ऑफ़ कर चुके थे क्योंकि वो वापस लौटने का अपने कमांडर का ऑर्डर लेना नहीं चाहते थे। मगर इससे पहले कि वो पाँचवें टैंक को तबाह कर पाते, उस टैंक से निकले गोले ने अरुण के टैंक को निशाना बना दिया और सेकेंड लेफ़्टिनेंट अरुण खेत्रपाल शहीद हो गए। उनकी इस वीरता के लिए उनकी शहादत को सम्मान देते हुए उन्हें सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी शहादत को 50 साल पूरे हो रहे हैं और साथ ही 1971 की उस जंग के भी 5 दशक गुज़र चुके हैं। इस मौक़े पर रेडियो सबरंग ने खोजा सेकेंड लेफ़्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के छोटे भाई मुकेश खेत्रपाल को।
By Radio Sabrang16 दिसंबर 1971, सुबह 10 बजकर 15 मिनट का वक़्त। 21 साल के सेकेंड लेफ़्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के टैंक ने दुश्मन के चार टैंक तबाह कर दिए थे। अरुण अपना रेडियो ऑफ़ कर चुके थे क्योंकि वो वापस लौटने का अपने कमांडर का ऑर्डर लेना नहीं चाहते थे। मगर इससे पहले कि वो पाँचवें टैंक को तबाह कर पाते, उस टैंक से निकले गोले ने अरुण के टैंक को निशाना बना दिया और सेकेंड लेफ़्टिनेंट अरुण खेत्रपाल शहीद हो गए। उनकी इस वीरता के लिए उनकी शहादत को सम्मान देते हुए उन्हें सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी शहादत को 50 साल पूरे हो रहे हैं और साथ ही 1971 की उस जंग के भी 5 दशक गुज़र चुके हैं। इस मौक़े पर रेडियो सबरंग ने खोजा सेकेंड लेफ़्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के छोटे भाई मुकेश खेत्रपाल को।