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15 अगस्त 1947 की वो सुबह कैसी रही होगी जब देश के आसमान में तिरंगा शान से लहरा रहा होगा, लंबे समय से चली आज़ादी की लड़ाई की क़ामयाबी का जश्न हर ओर होगा। उस समय आज़ादी का एक ही मतलब था- अँगरेज़ों के शासन से आज़ादी। मगर आज 76 साल बाद जब हम आज़ादी शब्द सुनते हैं तो हमारे लिए इस शब्द के क्या मायने हैं, यही जानने रेडियो सबरंग की स्वाति चौहान निकलीं ग़ाज़ियाबाद में इंदिरापुरम् की सड़कों पर। सुनिए लोगों ने क्या कहा-
By Radio Sabrang15 अगस्त 1947 की वो सुबह कैसी रही होगी जब देश के आसमान में तिरंगा शान से लहरा रहा होगा, लंबे समय से चली आज़ादी की लड़ाई की क़ामयाबी का जश्न हर ओर होगा। उस समय आज़ादी का एक ही मतलब था- अँगरेज़ों के शासन से आज़ादी। मगर आज 76 साल बाद जब हम आज़ादी शब्द सुनते हैं तो हमारे लिए इस शब्द के क्या मायने हैं, यही जानने रेडियो सबरंग की स्वाति चौहान निकलीं ग़ाज़ियाबाद में इंदिरापुरम् की सड़कों पर। सुनिए लोगों ने क्या कहा-