फूल है शिरीष।वसंत के आगमन के साथ लहक उठता है, आषाढ़ तक तो निश्चित रूप से मस्त बना रहता है। में रम गया तो भरे भादों में भी निर्बाध फूलता रहता ह। जब उमस से प्रं उबलता रहता है और लू से हृदय सूखता रहता ह,एकमात्र शिरीष कलजयी अवघूत की भांटिजीवन की आजेयता का मंत्रप्रचार करता रहता है।
मातंगिनी हाजरा,बेगम हजरत महल, सेनापति बापट, अरुणा आसफ अली,पोंटी श्रीरामुलू,भीकाजी कामा,तारा रानी श्रीवास्तव, कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी, कमलादेवी चट्टोपाध्याय, पीर अली खान ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों में थे जिनका जिक्र इतिहास के पन्नों में नही है।
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है जोर कितना बजुए कातिल में है... इन पंक्तियों को मशहूर बनाने वाले क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल की जानकारी कहानी।