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पंचतंत्र की कहानी : - बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता
कक्षा 8 वीं की संस्कृत की पाठ्यपुस्तक रुचिरा से ली गई है |
जातक कथा भगवान बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएँ हैं | ये कथाएँ लगभग 600 हैं | इसी शृंखला मे आपके समक्ष ये कहानी प्रस्तुत है जिसमे कर्मों और उनके फलों के बारे मे बताया गया है |
मैथिली शरण गुप्त की रचना पंचवटी से कुछ पंक्तियाँ :- जब राम और सीता अपनी पर्णकुटी मे विश्राम कर रहे हैं तब लक्ष्मण बाहर पहरा दे
रहे है
ऐसा माना जाता है कि मानव के पूर्वज वानर थे | पर आज के मानव के कृती देखकर वानर भी शर्मशार है | इंग्लिश मे लिखी गई कविता का हिन्दी अनुवाद आपके सामने प्रस्तुत है | कविता के कवि का नाम मुझे याद नहीं आ रहा है | आदरणीय कवि से हाथ जोड़कर माफी |
कक्षा 8 संस्कृत की पाठ्य पुस्तक रुचिरा 3 मे
" बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता " पाठ का सारांश |
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