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आपमें से जिन लोगों ने सलमान ख़ान की फ़िल्म जय हो देखी होगी उन्हें याद होगा कि उस फ़िल्म में बताए गए कॉन्सेप्ट, कि आप तीन लोगों की मदद करिए और उनसे कहिए कि वो तीन और लोगों की मदद करें- इस तरह एक दूसरे की मदद की एक चेन सी बन सकती है। ये फ़िल्म आई थी साल 2014 में।
मगर उसके पहले से ही ये कॉन्सेप्ट इस्तेमाल में ला रहे हैं रुषभ तुरखिया। रुषभ लोगों में काइन्डनेस यानी उनके दयालु होने के इसी तरह के सिस्टम की वकालत करते हैं- जिसका नाम है योर टर्न नाउ।
रेडियो सबरंग की स्वाति चौहान ने सबसे पहले उनसे पूछा कि ये योर टर्न नाउ का क्या कॉन्सेप्ट है-
By Radio Sabrangआपमें से जिन लोगों ने सलमान ख़ान की फ़िल्म जय हो देखी होगी उन्हें याद होगा कि उस फ़िल्म में बताए गए कॉन्सेप्ट, कि आप तीन लोगों की मदद करिए और उनसे कहिए कि वो तीन और लोगों की मदद करें- इस तरह एक दूसरे की मदद की एक चेन सी बन सकती है। ये फ़िल्म आई थी साल 2014 में।
मगर उसके पहले से ही ये कॉन्सेप्ट इस्तेमाल में ला रहे हैं रुषभ तुरखिया। रुषभ लोगों में काइन्डनेस यानी उनके दयालु होने के इसी तरह के सिस्टम की वकालत करते हैं- जिसका नाम है योर टर्न नाउ।
रेडियो सबरंग की स्वाति चौहान ने सबसे पहले उनसे पूछा कि ये योर टर्न नाउ का क्या कॉन्सेप्ट है-