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ज़ाइद ज़िन्दगी । शारिक़ कैफ़ी
कहानी और होती कुछ हमारी
अगर हम वक़्त से सोने की आदत डाल लेते
मगर हम तो
न जाने क्या समझते थे सहर तक जागने को
जो हम ने जाग कर काटी हैं नींद आते हुए भी
वो ज़ाइद ज़िंदगी है
वो ज़ाइद ज़िंदगी है जिस ने सारे मसअले पैदा किए हैं
जिसे जीने में
ख़्वाबों के ये उल्झट्टे हुए हैं
ज़ाइद: अतिरिक्त
By Nayi Dhara Radioज़ाइद ज़िन्दगी । शारिक़ कैफ़ी
कहानी और होती कुछ हमारी
अगर हम वक़्त से सोने की आदत डाल लेते
मगर हम तो
न जाने क्या समझते थे सहर तक जागने को
जो हम ने जाग कर काटी हैं नींद आते हुए भी
वो ज़ाइद ज़िंदगी है
वो ज़ाइद ज़िंदगी है जिस ने सारे मसअले पैदा किए हैं
जिसे जीने में
ख़्वाबों के ये उल्झट्टे हुए हैं
ज़ाइद: अतिरिक्त