"मैंने लहू के कतरे मिट्टी में बोए हैं,
खुशबू जहां भी है मेरी कर्ज़दार है।
ए वक्त होगा एक दिन तेरा मेरा हिसाब,
मेरी जीत जाने कब से तुझ पर उधार है।"
------मनोज मुंतशिर
अपने लिखे गानों, शायरी, फिल्मों के डायलॉग से बॉलीवुड में अपनी खास जगह बनाने वाले मनोज मुंतशिर की ज़िंदगी में एक ऐसा भी वक्त था जब उन्हें फुटपाथ पर रातें गुज़ारनी पड़ी...आख़िर मनोज मुंतशिर को क्यों सोना पड़ा फुटपाथ पर? क्यों हफ्तों तक रोटी के लिए तरसे मनोज???