तेरा एहसास अब भी बाक़ी है
साँसों में अब भी तेरी ख़ुशबू आती है
जब तेरा ज़िक्र छिड़ता है,
काश तुझे देखकर मैं मुड़ गया होता
ना कोई किसी से जुदा होता,
काश हम कभी मिले ही ना होते,
ना ये दिल तुझसे जुड़ा होता
दिल के ख़ाली साँचे में मैंने,
जहाँ तेरा बसर हुआ करता था कभी,
किसी और ने अब वहाँ घर बना रखा है
तेरा एहसास अब भी बाक़ी है