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यूं तो जीवन में कई प्रकार के कष्ट आते हैं जो दुखदाई होते हैं, लेकिन कुछ खास ऐसे कारण हैं जिनके पीछे हर कोई दुख और खेद प्रकट करता है I
अगर कभी आपका अपमान हो जाए, तब आप अपनी पत्नी को इसके बारे में ना बताएं...
आचार्य चाणक्य के मुताबिक, पत्नी वियोग के अलावा अपने ही लोगों से बेइज्जत होना, बचा हुआ ऋण, दुष्ट राजा की सेवा करना, गरीबी एवं दरिद्रों की सभा करना आदि अंदर से मर जाने के बराबर है I
आचार्य का मानना था कि इंसान की कुछ आदतें माता लक्ष्मी को नाराज कर देती हैं I
पति पत्नी दोनों को ही अपने बीच की बातों को खुद तक ही सीमित रखना चाहिए I
आपको भी जीवन में वो सब मिलेगा जो आप डिजर्व करते हैं, बस आपको थोड़ा सब्र रखना होगा I
जो पुरुष पराई स्त्री पर नजर नहीं रखता वह सर्वोत्तम है।
अर्थात :जब प्रलय का समय आता है तो समुद्र भी अपनी मर्यादा छोड़कर किनारों को छोड़ अथवा तोड़ जाते है, लेकिन सज्जन पुरुष प्रलय के सामान भयंकर आपत्ति अवं विपत्ति में भी आपनी मर्यादा नहीं बदलते I
हर काम से डरने वाला व्यक्ति जीवन में कभी सफल नहीं हो सकता है I
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