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किसी भी व्यक्ति की सफलता में इस बात का काफी योगदान होता है कि उसकी अपनी क्षमता कितनी है और उसने अपनी क्षमता का इस्तेमाल किस तरह से किया है।
जो इंसान धन के मद में व्यसनी हो जाता है उसका परिवार भी सुखी नहीं रह पाता है।
PART II
आचार्य चाणक्य कहते हैं की कल्पवृक्ष काष्ठ है। सुमेरु पहाड़ है। पारस केवल एक पत्थर है। सूर्य की किरणें तीव्र हैं। चन्द्रमा घटता-बढ़ता रहता है। समुद्र खारा है। कामदेव का शरीर नहीं है। बलि दैत्य है। कामधेनु पशु है। हे राम ! मैं आपकी तुलना किसी से नहीं कर पाता हूं। आपकी उपमा किससे दी जाए।
ज्ञान और अनुभव एक सिक्के के दो पहलू हैं।
कई बार मनुष्य इस लत की गिरफ्त में आकर अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है। इसी लत की चपेट में आकर वो न केवल अपना वर्तमान दांव पर लगा देता है बल्कि भविष्य भी अंधकारमय कर देता है।
धन की देवी लक्ष्मी स्वयं वहां चली आती है जहाँ, मूर्खो का सम्मान या मूर्खों की पूजा नहीं होती,अनाज का अचछे से भणडारण किया जाता है, पति, पत्नी मे आपस मे लड़ाई-झगड़ा नहीं होता है i उन लोगों की संपत्ति अपने-आप बढ़ने लगती है।
जो व्यक्ति दिल का छोटा होता है, उसकी सोच भी छोटी होती है। ऐसा इंसान अपने और पराए के बीच में फंसकर रह जाता है।
संकट के समय व्यक्ति को कोई भी फैसला सोच समझ कर लेना चाहिए। जब संकट आता है तो चुनौतियां भी काफी बढ़ जाती हैं और अवसर बहुत कम होते हैं।
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