’एक गीत सौ अफ़साने’ के श्रोता मित्रों का एक बार फिर से स्वागत है, नमस्कार! दोस्तों, देखते ही देखते हम आ पहुँचे हैं साल 2021 के अन्तिम सप्ताह में। और यह वह सप्ताह है जिसमें हम सब रहते हैं ज़रा हल्के मूड में। घूमना-फिरना और खाना-पीना तो है ही, साथ ही हम मंथन करते हैं जाने वाले साल की उन गतिविधिओं पर जिन्होंने हमारी ज़िन्दगी पर छाप छोड़ा, और प्लानिंग् करते हैं अगले साल की। इसी बात पर शुरू करते हैं साल 2021 का अन्त्तिम ’एक गीत सौ अफ़साने’।
दोस्तों, आज के अंक के लिए हमने जो गीत चुना है, वह वैसा ही हल्का-फुल्का है जैसा कि साल के इस आख़िरी सप्ताह में हम सब का मूड है। हमारी फ़िल्मों में ख़ास मौक़ों के लिए बहुत से गाने बने हैं। मसलन होली, दीवाली, ईद, वगेरह। पर जब नये साल के मौक़े पर बनने वाले गीतों की बात आती है, तो लिस्ट बहुत ज़्यादा लम्बा नहीं बन पाती। New Year Songs बने ज़रूर हैं पर मुट्ठी भर गाने ही कामयाब रहे। फ़िल्म ’दो जासूस’ के "Happy New Year to you", इसी फ़िल्म का "साल मुबारक साहिब जी", फ़िल्म ’नज़राना प्यार का’ का गीत "नया साल आये, तमाशे दिखाये", और थोड़ा सा पीछे चलें तो 1954 की फ़िल्म ’सम्राट’ में आशा भोसले का गाया "सबको मुबारक नया साल" वो गाने हैं जो हिट हुए। पर जो गीत लोकप्रियता के पयमाने पर सर्वाधिक ऊपर रहा, और जो आज भी हर नये साल पर सुनने को मिल जाता है, वह है 1986 की फ़िल्म ’आपके साथ’ का शब्बीर कुमार और साथियों का गाया "आने वाले साल को सलाम, जाने वाले साल को सलाम, नये साल का पहला जाम, आपके नाम"। आनन्द बक्शी के बोल, लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल का संगीत। और यही गीत है ’एक गीत सौ अफ़साने’ का आज का गीत।