नमस्कार दोस्तों, ’एक गीत सौ अफ़साने’ की एक और कड़ी के साथ हम फिर हाज़िर हैं। फ़िल्म-संगीत की रचना प्रक्रिया और विभिन्न पहलुओं से सम्बन्धित रोचक प्रसंगों, दिलचस्प क़िस्सों और यादगार घटनाओं को समेटता है ’रेडियो प्लेबैक इण्डिया’ का यह साप्ताहिक स्तम्भ। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों और हमारे शोधकार्ताओं के निरन्तर खोज-बीन से इकट्ठा किए तथ्यों से परिपूर्ण है ’एक गीत सौ अफ़साने’ की यह श्रॄंखला। आज के अंक के लिए हमने चुना है वर्ष1964 की चर्चित फ़िल्म ’पुनर्मिलन’ का गीत "पास बैठो तबियत बहल जाएगी, मौत भी आ गई हो तो टल जाएगी"। मोहम्मद रफ़ी की आवाज़, इन्दीवर के बोल, और सी. अर्जुन का संगीत। इस गाने सिचुएशन सुन कर इन्दीवर, सी. अर्जुन को लेकर बस में क्यों बैठ गए? बस में ऐसी कौन से मज़ेदार बात हुई जिससे इस ग़ज़ल की नीव रखी गई? क्यों इन्दीवर ने बस में अपने बगल में बैठे सी. अर्जुन को सीट से उठ जाने को कहा? सी. अर्जुन क्यों चाहते थे कि रफ़ी साहब ही इस ग़ज़ल को गायें? ये सब आज के इस अंक में।