Here’s an episode that will keep you waiting for the next one. Tune in now!This gazal is written by
Rizwan khan sultan alig
मैं अश्कों से दामन भिगोता रहा हूं
फकत उस की यादों मे रोता रहा हूं
है आंखों मे अब तक वो गुज़रा ज़माना
मैं दिल मे वो यादें समोता रहा हूं
कभी तो मिलेगी वो खाबों की हस्ती
ख्यालात जिस के संजोता रहा हूं
मुहब्बत के मौजु से धागा बना कर
बस अशार उस में पिरोता रहा हूं
बनाना है एक रोज़ उल्फत का गुलशन
ये ही सोच कर बीज बोता रहा हूं