प्रेमानंद महाराज जी के गुरु ज्ञान की मुख्य बातें:
- गुरुदेव की कृपा ही सर्वोपरि: महाराज जी के अनुसार, भगवत साक्षात्कार के लिए गुरु की आज्ञा का पालन करना और उनका अनुग्रह पाना ही सबसे महत्वपूर्ण है।
- गुरु आज्ञा ही सेवा है: गुरु की आज्ञा ही अंतिम सत्य है। जो गुरु की आज्ञा मानता है, वही सच्चा शिष्य है।
- प्रेम लक्षणा भक्ति: उनके गुरु ने उन्हें राधारानी की शरणगति और 'सहचरी भाव' (राधा-कृष्ण की नित्य सेवा) के मार्ग पर चलने का ज्ञान दिया।
- गुरु के प्रति समर्पण: गुरु रसिक संतों के सत्संग में बने रहना और गुरु की वाणी का पालन करना।
- आंतरिक सुख: जीवन में बाहरी सुख के बजाय आंतरिक शांति और भगवान के प्रति प्रेम को सर्वोपरि मानना।
प्रेमानंद महाराज जी ने अपने गुरुदेव से मिले ज्ञान को ही अपने जीवन का आधार माना है, जो उन्हें ज्ञान मार्ग से प्रेम मार्ग की ओर ले गया।
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