Written and vocal -Deepak Mahapatre. Line's-. आसामां
आसामां के पंछी आसां में उतर रहे हैं,
तूफ़ां अभी थमा है वो फिर से संभल रहे हैं,
सुनी तन्हाईओं से भरे ,हैं मेरे रास्ते
शरपसंदी के अपने रंग बदल रहे हैं,
आसामां के फ़ज़ीलत करते थक चुका हूँ
अब मुझे जमीं के मिट्टियाँ बुला रहे हैं,
आसामां के पंछी आसां में उतर रहे हैं
तहज़ीब में रहने को कहते हैं लोग मुझसे
जो आसमां के सपने उड़ा रहे हैं,
मेरा बसेरा एक ही है, जमीं
लोग आसां में घर के इल्ज़ाम लगा रहे हैं,
आसमां के पंछी आसमाँ में उतर रहे हैं ।
मोहब्बत बिक जा रही है वक़्त नाम के पर
धूप ढली नही ,आब शबनम में बदल जा रहे हैं,
बादल ढकती जाती मुझे एक बाद एक
दोस्ती के नाम पर लोग ठगते जा रहे हैं,
आसमान के पंछी आसमां में उतर रहे हैं।
तूफ़ां उड़ा ले गई सारि बस्तियाँ
अब बचे घर के मेरे दीवाल, से लोग ईंट उठा रहे हैं,
क्या हो गया इन शहर के लोगों को
फटाके के रोशनी देख ये दीपक बुझा रहे हैं,
आसमां के पंछी आसमान में उतर रहे हैं।