आलोकधन्वा की कविता, 'पतंग' बच्चों, पतंग और शरद के बहाने जीवन, प्रकृति, धरती, बचपन, उत्साह, सपनों, संघर्ष, जिजीविषा, सामूहिकता, नव सृजन और मनुष्यता की रागात्मक अभिव्यक्ति है। इस कविता में कोमलतम अनुभूतियां और श्रेष्ठतम स्वप्न-संकल्प साथ-साथ प्रकट हुए हैं।