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हर वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई अष्टमी व्रत रखा जाता है। संतान सुख, बच्चे की दीर्धायु और उसके अच्छे भविष्य के लिए इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं। आइये सुनते हैं अहोई अष्टमी व्रत की कथा।
हिंदू धर्म में करवा चौथ व्रत का अत्यंत महत्व है। यह व्रत सुहागिनों के लिए बेहद खास माना गया है। चंद्रमा को सुख, शांति व आयु कारक माना गया है। मान्यता है कि इनकी पूजा करने से वैवाहिक जीवन सुखद होता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत करती हैं। आइये सुनते हैं करवा चौथ व्रत की कथा।
श्री गणेश जी को विघ्हर्ता भी कहा जाता है। वो मनुष्य के जीवन में आने वाले कष्टों को हर लेते है। गणेश चतुर्थी पर व्रत रखने वालो को इस कथा का वाचन अथवा श्रवण करना चाहिए। आइये सुनते है इस व्रत कथा को।
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष कुल 12 शिवरात्रि तिथि पड़ती हैं। यह शिवरात्रि तिथि प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर मनाई जाती हैं। इन शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि तथा श्रवण शिवरात्रि अत्यधिक महत्वपूर्ण मानी गई हैं। मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करना मंगलमय है। सावन शिवरात्रि पर व्रत रखने वाले भक्तों को कथा श्रवण जरूर करना चाहिए। कहा जाता है कि कथा का पाठ करने से सावन शिवरात्रि व्रत का पूर्ण फल मिलता है।
16 सोमवार व्रत से भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है। भगवान शंकर देवों के देव, महादेव कहलाते हैं, इसलिए इनकी पूजा करके मनचाहे फल पाए जा सकते हैं।
सोमवार का व्रत श्रावण, चैत्र, वैसाख, कार्तिक व मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि से शुरू किया जाता है। आइये सुनते है इस व्रत की कथा को
प्रदोष व्रत अति मंगलकारी और शिव कृपा प्रदान करने वाला है। यह व्रत प्रत्येक महीने के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है, इसलिए इसे वार के अनुसार पूजन करने का विधान शास्त्र सम्मत माना गया है यदि इन तिथियों को सोमवार हो तो उसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं, यदि मंगलवार हो तो उसे भौम प्रदोष व्रत कहते हैं और शनिवार हो तो उसे शनि प्रदोष व्रत व्रत कहते हैं। शनि प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ शनि की भी पूजा करनी चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से भगवान शिव और शनि देव भक्त की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं। प्रदोष व्रत में व्रत कथा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन व्रत कथा पढ़ने या सुनने से भगवान शंकर की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
आइये हम आपको बताते हैं शनि प्रदोष व्रत कथा के बारे में।
प्रदोष व्रत अति मंगलकारी और शिव कृपा प्रदान करने वाला है। यह व्रत प्रत्येक महीने के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है, इसलिए इसे वार के अनुसार पूजन करने का विधान शास्त्र सम्मत माना गया है यदि इन तिथियों को सोमवार हो तो उसे सोम प्रदोष व्रत कहते है। प्रदोष व्रत में व्रत कथा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन व्रत कथा पढ़ने या सुनने से भगवान शंकर की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
आइये हम आपको बताते हैं भौम प्रदोष व्रत कथा के बारे में।
गुरुवार का दिन बृहस्पति देव को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न कर वैवाहिक जीवन में सुख शांति वरदान पाया जा सकता है।
पौराणिक कथाओं की मानें तो मां संतोषी के पिता भगवान गणेश और माता रिद्धि-सिद्धि हैं और धन-धान्य और रत्नों से भरा परिवार होने के कारण इन्हें देवी संतोषी कहा जाता है। धर्म शास्त्रों की मानें तो शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी के साथ ही माता संतोषी को भी समर्पित होता है इसलिए इस दिन इनकी पूजा और व्रत को बेहद शुभ माना जाता है।
मंगलवार व्रत कथा का अत्यंत खास महत्व है। शास्त्रों के अनुसार सुख-सम्पत्ति, यश और संतान प्राप्ति के लिए मंगलवार का व्रत रखना बेहद शुभ माना जाता है। हनुमान जी से जुड़ी मंगलवार व्रत कथा का पाठ करके इस उपवास को पूरी श्रद्धा के साथ पूरी करनी चाहिए।
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