एक पल को ही सही, आपको कोई खुशियों से मिला दे
सोचो कैसा हो अगर कोई, यूँ ही बेवज़ह मोमोज़ खिला दे,
कितने हो गए मोमोज़ ,ना गिने ना आपको गिनाता रहे
बस आप खाते रहो और वो चुपचाप खिलाता रहे,
जहाँ मेयोनीज़ और एक्स्ट्रा चटनी की कोई कमी न हो
जो अपनी प्लेट भी आपकी तरफ बढ़ा दे,
इस दुनिया में ऐसा कोई अपना ढूढ़ना...
तो जब भी मन करे मोमोज़ खाओ और खिलाओ
बाकि मोमोज़ वाला ये किस्सा कैसा लगा ?
कसमें, वादें, प्यार, विचार और सलाह जो भी देना है यहाँ आप दे सकते हैं...
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