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December 18, 2020सीने में सुलगते हैं अरमाँ..किसी दिसंबर की एक सर्द रात में सीने में सुलगते हुँये अरमा लेकर आपकी खिदमत में..4 minPlay
December 10, 2020मेरी नज़्म - वो कहती है उसे कुछ भी याद नहीं रहतामेरी एक नज़्म, पहले मेरी और फिर एक दोस्त की आवाज़ में. सुनिये.4 minPlay
October 12, 2020शोरीदगी के हाथ से है सर वबाले दोशIn this third episode of Azad Mard, we talk about Mirza Ghalib as an omniscient, omnipresent companion of ours, comforting us in our tough times, our loneliness.6 minPlay
October 07, 2020जा़हिर है तेरा हाल - मिर्झा गा़लिबआजा़द मर्द के दुसरे एपिसोड में आज हम गा़लिब की एक नई ग़जल लेकर आये हैं. "घर जब बना लिया है तेरे पर कहे बगै़र, जानेगा अब भी तू न मेरा घर कहे बगै़र.."13 minPlay