एक पुरुष का प्रेम स्त्री के लिए सर्वथा भिन्न होता है। पुरुष प्रेम दर्शाने के लिए अपनी इंद्रियों का इस्तेमाल करता है। वो औरत को छू कर बताता है कि उसे उस औरत से कितना प्रेम है।
सुनों! तुम कुछ भी कर लेना पर इस छवि को मेरे मन से मत निकलने देना। नहीं मांगता मैं जन्म भर का साथ। न ही तुम पर कोई अधिकार मांगता हूं। जो मांग ही लिया तो फिर प्रेम कैसे हुआ?
आप चाहते हैं, वो रोशनी आपको फिर दिखे, मगर आपको कुछ नहीं दिख रहा। भेड़िया भी दिख जाता तो शायद आप बच जाते। मगर वो आपको गुफ़ा में घुसा कर कहीं गुम हो गया है, अब आप क्या करेंगे?
कभी - कभी अपने आपको कमज़ोर मान लेना चाहिए। उससे होता ये है कि बहुत बोझ हट जाता है, ख़ुद के कंधों से। हम इस मुगालते में रहते हैं कि सब कुछ हम कर रहे हैं पर बहुत कुछ है जो हमारी नजरों से परे है।
आज मैं अपने बाप के ब्रांड पर आ गया। एक अलग सा ही नशा मुझ पर छा गया। वो कमरे में उड़ता धुआं, शीशे से पिघलता आब, ग्लास में अपनी शक्ल इख्तियार करता हुआ, उन शामों के कहकहे एक दीवार से उड़कर दूसरी में समाने लगे।
खेल चलते रहना चाहिए, यही एकमात्र नियम है खेल का, ये खेल भूखे पेट का है, भूखी आंखों का है, छोटे अंगिया चोली का है, ये खेल आँखों से आँखें मिला कर मांगने का है, कुछ मिल जाने पर आपस में छीनने का है।
बत्ती बुझाने से पहले एक बार देख लेना चाहिए। लोग कमरों में हैं या नहीं? दरवाज़े बंद हैं या नहीं? चीज़ें अपनी जगह है या नहीं? दिल धड़क रहे हैं या नहीं? आँखें बंद है, या शून्य में तक रही है। और तक रही है तो क्या ठंडी दीवारों के पार देख पा रही है?
एक बारह बाय दस का कमरा कितना बड़ा हो सकता है? ये अभी हाल ही में उसे पता लगा। इस कमरे में एक बार घुसने के बाद आदमी गुम हो सकता है। वो घंटों एक जगह बैठा रह सकता है और सैंकड़ों बार जगह भी बदल सकता है।