इसे तुम कविता नही कह सकते #ain't Poetry?

इसे तुम कविता नही कह सकते #ain't Poetry?

By Lokesh GulyaniSociety & CulturePhilosophy
Download on the App Store

इसे तुम कविता नही कह सकते #ain't Poetry? episodes

  • Episode 11 - लीनियर स्ट्रिप (linear strip)
    एक दिन शायद उन्होंने भी अपने कुएं में झांक लिया था। शायद ख़ुद को ही देख लिया था। उसके बाद वे वैसी न रही। फिर हम भी उनसे वैसे न रहे।
    4 min
  • Episode 10 - मिट्ठू बोलो राम-राम
    सोचने वाली बात है कि समय क्या खाता होगा? क्या समय वेजिटेरियन है या नॉन–वेजिटेरियन, या कोहली की तरह वीगन? कहीं समय परजीवी तो नहीं? या कहीं ऐसा होता हो कि हर बीतते पल को आने वाला पल निगल जाता हो और डंग बीटल की तरह वक्त लुढ़कता चला जाता हो?
    3 min
  • Episode 9 - प्रेम गीत
    तुम्हारे भरोसे का आधार तो मैं ही हूं फिर मेरे भरोसे का आधार तुम क्यों नहीं हो? क्या मैंने भविष्य देख लिया है या मुझे अतीत ने ही डस लिया है?
    4 min
  • Episode 7 - Natgeo से Pogo
    लड़ने से ज़्यादा न लड़ने का डर ज़्यादा बड़ा होता है। जब हम लड़ते हैं तो किसी से लड़ते हैं और जब हम लड़ना स्थगित करते हैं तो ख़ुद से लड़ते हैं। ख़ुद से लड़ने में हार ही हार है।
    4 min
  • Episode 5 - भूखे आदमी की फ़िक्र
    मेरे लिए कभी किसी का पानी आंखों से उतर कर मट्टी में नहीं समाया। अगर समाया होता तो मैं उसे ढूंढ लेता हर उस कण में जहां उसके मिलने की उम्मीद होती और उसे बाहर खींचने में त्याग देता अपनी भी आंख का खारा पानी।
    3 min
  • Episode 3 - तुम irrelevant हो
    जैसे ये शरीर की सुई थी, वैसी ही क्या कोई सिरेंज मन को टटोलने के लिए मिलती है? क्या मन की परतों में कोई सुई घुसाई जा सकती है और उसका हाल पता किया जा सकता है? क्या मन को कोई गोली देकर भटकाया जा सकता है, ख़ुश किया जा सकता है, कुछ भूलने को विवश किया जा सकता है। बात न मानने पर क्या मन की बाँह मरोड़ी जा सकती है या उसे चांटा लगाया जा सकता है?
    4 min
  • Episode 2 - Midlife Crisis
    एक ख़्याल जब हम उसे ढूंढने की कोशिश करते हैं, जिससे हमनें प्यार किया था
    4 min

About इसे तुम कविता नही कह सकते #ain't Poetry?

From the publisher's feed

Poetic prose by Lokesh Gulyani (हिंदी)