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सबको चाहिए खबरें सुपरफास्ट। देश-विदेश और राजनीति, entertainment जगत, खेल और Business की दुनिया में क्या हो रहा है, यह सभी जानना चाहते हैं। अगर आप खबर पढ़ना या देखना नहीं चाहते हैं तो जनसत्ता सुर्खियां... more
FAQs about Jansatta - Surkhiya - सुर्ख़ियाँ (Headlines):How many episodes does Jansatta - Surkhiya - सुर्ख़ियाँ (Headlines) have?The podcast currently has 1,194 episodes available.
April 09, 2024मोजाम्बिक में नौका पलटने से कम से कम 98 लोगों की मौत | सुर्खियां | 9.April| 2 PMमोजाम्बिक के लुंगा में कथित तौर पर हैजा फैलने के कारण वहां से भाग रहे स्थानीय निवासियों से भरी एक कामचलाऊ नौका देश के उत्तरी तट के पास डूब गई, जिससे कम से कम 98 लोगों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया ने सोमवार को यह जानकारी दी। बताया जा रहा है कि नौका में क्षमता से अधिक लोग सवार थे। सरकारी ‘रेडियो मोजाम्बिक’ ने द्वीप के प्रशासक सिल्वेरियो नौआइतो के हवाले से बताया कि नौका रविवार को दक्षिण-पूर्वी अफ्रीकी देश के तट से निकटवर्ती मोजाम्बिक द्वीप के लिए रवाना होने के बाद डूब गई। उसने बताया कि नौका में लगभग 130 लोग सवार थे और कम से कम 11 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ‘नोतिसियास’ समाचार पत्र ने नौआइतो के हवाले से बताया कि अधिकतर शवों को रविवार को बरामद कर लिया गया था, लेकिन सोमवार को सात और शव मिले, जिससे मरने वालों की संख्या 91 से बढ़कर 98 हो गई। नौआइतो ने रेडियो स्टेशन को बताया कि बचाव अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि यह बताना मुश्किल है कि कितने लोग लापता हैं। ‘रेडियो मोजाम्बिक’ ने बताया कि नामपुला प्रांतीय प्राधिकरण ने एक बयान जारी कर नौका के डूबने का कारण ‘‘यात्रियों को लाने-ले जाने के लिए अनुपयुक्त नौका का इस्तेमाल करना और नौका में क्षमता से अधिक लोगों का सवार होना’’ बताया। देश के प्रमुख और सबसे पुराने अखबारों में से एक ‘नोतिसियास’ ने बताया कि इस नौका का इस्तेमाल आम तौर पर मछलियां पकड़ने के लिए किया जाता था और लुंगा शहर के लोग हैजा से बचने के लिए वहां से भागकर मोजाम्बिक द्वीप जाने की कोशिश कर रहे थे। स्थानीय लोगों का मानना है कि लुंगा में हैजा के मामलों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। समाचार पत्र ने बताया कि वे मोजाम्बिक द्वीप पहुंचना चाहते थे और वे ‘‘नौवहन के लिए अनुपयुक्त’’ नाव में चढ़ गए लेकिन द्वीप पर पहुंचने से पहले ही नाव पलट गई। मोजाम्बिक और उसके पड़ोसी दक्षिण अफ्रीकी देशों जिम्बाब्वे और मलावी हाल के महीनों में हैजा के प्रकोप से प्रभावित हुए हैं। मोजाम्बिक के कई स्थानों तक केवल नौकाओं के जरिए ही पहुंचा जा सकता है और इन नौकाओं में अक्सर क्षमता से अधिक लोग सवार रहते हैं। देश में सड़क नेटवर्क खराब है और कुछ क्षेत्रों तक जमीन या हवाई मार्ग से पहुंचा नहीं जा सकता।...more5minPlay
April 09, 2024उत्तराखंड में तरसेम सिंह हत्याकांड का शार्पशूटर अमरजीत एनकाउंटर में ढेर, 12 दिन से था फरार | सुर्खियां | 9.April| 10 AMनानकमत्ता गुरुद्वारे के कारसेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की गोली मारकर हत्या करने वाले एक आरोपी का एनकाउंटर हो गया है। वहीं दूसरा आरोपी फरार हो गया है और उसकी तलाश में STF और पुलिस जुटी हुई है। अमरजीत सिंह को उत्तराखंड एसटीएफ और हरिद्वार पुलिस ने थाना भगवानपुर क्षेत्र में मुठभेड़ में मार गिराया है।डीजीपी उत्तराखंड अभिनव कुमार ने बताया कि बाबा की हत्या को उत्तराखंड पुलिस ने चुनौती के रूप में लिया था और लगातार एसटीएफ और पुलिस दोनों आरोपियों की तलाश कर रही थी। उन्होंने कहा कि इनके सिर पर एक लाख रुपये का इनाम रखा गया था। पुलिस ने कुख्यात शूटर अमरजीत सिंह उर्फ बिट्टू को मार गिराया। वहीं, उसका एक साथी भागने में सफल रहा।...more3minPlay
April 08, 2024AAP नेता दुर्गेश पाठक को ईडी का समन, केजरीवाल के निजी सचिव विभव कुमार से पूछताछ | सुर्खियां | 8.April| 8:30 PMदिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद एक और आप नेता की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने शराब घोटाले में दुर्गेश पाठक को समन भेजा है। एक अधिकारी ने कहा कि पाठक को भी सोमवार को तलब किया गया है। उनका नाम गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान नकद भुगतान से संबंधित कुछ बयानों में सामने आया है। उनके दोपहर में ईडी ऑफिस में पेश होने की उम्मीद है।प्रवर्तन निदेशालय इस समय दिल्ली के कथित शराब घोटाला मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव बिभव कुमार से पूछताछ कर रही है। बिभव कुमार से शराब घोटाले में कुछ दस्तावेजों की जांच को लेकर पूछताछ की जा रही है।प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाय है कि साउथ ग्रुप ने हवाला के माध्यम से 45 करोड़ रुपये की घूस ली थी। इन पैसों का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी ने साल 2021-22 में गोवा विधानसभा चुनाव के समय चुनावी कैंपेन के लिए किया था। बताया जाता है कि जांच एजेंसी ने दावा किया है कि दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया के करीबी माने जाने वाले दिनेश अरोड़ा के बयान पर किया है। इस चुनाव प्रचार में ग्राउंड वर्क कर रहे लोगों को कैश पेमेंट किया गया था।...more4minPlay
April 08, 2024सूर्य ग्रहण पर बन रहा 4 ग्रहों का संयोग, जानिए भारत में दिखाई देने का समय और सबकुछ | सुर्खियां | 8.April| 5 PMहिंदू धर्म में सूर्य और चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व है। आपको बता दें कि सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तो वहीं चंद्रमा हमेशा पूर्णिमा तिथि को पड़ता है। आपको बता दें कि इस साल का पूर्ण सूर्य ग्रहण 8 अप्रैल यानी कि आज रात को लगने जा रहा है। ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को बेहद अशुभ माना जाता है और तो राहु द्वारा सूर्य या चंद्र के ग्रास से ग्रहण लगता है। वहीं ग्रहण के दौरान पृथ्वी पर राहु का प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए ग्रहण काल में शुभ कार्य करने की मनाही होती है। साथ ही यह सूर्य ग्रहण मीन राशि और रेवती नक्षत्र लगेगा। वहीं आपको बता दें कि यह ग्रहण भारत में मान्य नहीं होगा। इसलिए इसके सूतक मान्य नहीं होंगे। वैदिक पंंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण 08 अप्रैल को रात 09 बजकर 12 मिनट पर आरंभ होगा और देर रात 09 अप्रैल 02 बजकर 22 मिनट पर इसका अंत समाप्त होगा।...more4minPlay
April 08, 2024जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमले से बड़ी दुर्घटना का खतरा बढ़ा | सुर्खियां | 8.April| 2 PMसंयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रोसी ने रविवार को कहा कि रूस-नियंत्रित जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र के छह परमाणु रिएक्टर में से एक पर किए गए ड्रोन हमले के कारण ‘‘बड़ी परमाणु दुर्घटना होने का खतरा काफी बढ़ गया है।’’ ग्रोसी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक बयान में इस बात की पुष्टि की कि जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र की मुख्य रिएक्टर नियंत्रण संरचनाओं पर कम से कम तीन प्रत्यक्ष हमले हुए। उन्होंने कहा कि नवंबर 2022 के बाद यह पहला ऐसा हमला था, तब उन्होंने रेडियोलॉजी संबंधी गंभीर परमाणु दुर्घटना से बचने के लिए पांच बुनियादी सिद्धांत निर्धारित किए थे। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण (एआईईए) ने एक अलग बयान जारी कर एक रिएक्टर समेत संयंत्र पर ड्रोन हमलों का असर होने की पुष्टि की। एआईईए ने कहा, ‘‘इकाई छह में हुई क्षति के कारण परमाणु सुरक्षा को खतरा पैदा नहीं हुआ, लेकिन यह एक गंभीर घटना है जिससे रिएक्टर की रोकथाम प्रणाली के कमजोर होने की आशंका है।’’ रूस के नियंत्रण वाले जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र के अधिकारियों ने कहा है कि रविवार को यूक्रेन की सेना के ड्रोन से संयंत्र पर हमले किए गए जिनमें संयंत्र की छठी विद्युत इकाई के गुंबद पर किया गया हमला भी शामिल है। संयंत्र के अधिकारियों ने कहा था कि इस घटना में कोई बड़ी क्षति नहीं हुई और कोई हताहत भी नहीं हुआ तथा हमले के बाद संयंत्र में विकिरण का स्तर सामान्य बना रहा लेकिन बाद में रविवार को रूसी परमाणु एजेंसी ‘रोसाटॉम’ ने कहा कि ‘‘अप्रत्याशित ड्रोन हमलों’’ में तीन लोग घायल हो गए। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने रविवार को कहा था कि उसके विशेषज्ञों को ड्रोन हमले की सूचना दी गई है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल मरियानो ग्रोसी ने इस तरह के हमलों की वजह से सुरक्षा को होने वाले खतरों को लेकर चेताया। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘मैं इस तरह की कार्रवाइयों से बचने का अनुरोध करता हूं जो आईएईए के सिद्धांतों के खिलाफ हैं और परमाणु सुरक्षा को प्रभावित करती हैं।...more4minPlay
April 08, 2024अमृतपाल सिंह की मां बलविंदर कौर को पंजाब पुलिस ने किया गिरफ्तार | सुर्खियां | 8.APRIL | 10 AMपंजाब में ‘वारिस पंजाब दे’ प्रमुख और खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह को असम की जेल से पंजाब की जेल में स्थानांतरित करने की मांग को लेकर प्रस्तावित मार्च से एक दिन पहले रविवार को उसकी मां बलविंदर कौर को गिरफ्तार कर लिया गया। अमृतपाल सिंह को पिछले साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाया गया था। अमृतपाल सिंह और उसके नौ साथी इस समय असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं।पुलिस उपायुक्त आलम विजय सिंह ने रविवार को बताया कि अमृतपाल सिंह की मां बलविंदर कौर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। डीसीपी ने कहा कि उन्हें एहतियातन हिरासत में लिया गया है। अधिकारी ने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी।करीब एक महीने पहले कट्टरपंथी संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के चीफ और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह और उसके नौ सहयोगियों के खिलाफ सुरक्षा चूक मामले में असम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी। असम पुलिस ने इस मामले में डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल के अधीक्षक निपेन दास को गिरफ्तार किया था। इतना ही नहीं निपेन दास पर यूएपीए (UAPA) के तहत कार्रवाई की गई थी। इसके अलावा आपराधिक साजिश रचने, असम प्रिजनर्स एक्ट के तहत उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था।...more4minPlay
April 07, 2024मजब चूड़ी बेचने वाले और हलवाई के बीच हुआ चुनावी मुकाबला, अंग्रेजों ने उड़ाया मजाक लेकिन परिणाम देख उड़ गए होश | सुर्खियां | 7.APRIL | 8:30 P1920 में दिल्ली निवासी अब्दुल माजिद ब्रिटिश सरकार की नज़र में आये। वह ऐसे व्यक्ति थे जिनका प्रशासन के रडार पर आना सामान्य बात नहीं थी। माजिद की मिठाई की दुकान थी। उन्हें कुछ लोग हलवाई भी कहते थे।माजिद ब्रिटिश सरकार की नजर में कैसे आ गए थे? दरअसल, माजिद ने नवंबर 1920 के चुनाव में नामांकन पत्र दाखिल किया था। उनके विरोध में कुछ वकील और एक चूड़ी बेचने वाला खड़ा था। सरकार ने पहले तो माजिद और चूड़ी विक्रेता की उम्मीदवारी को गंभीरता से नहीं लिया।लेकिन जब परिणाम आए तो ब्रिटिश सरकार के होश फाख्ता हो गए। माजिद ने 288 वोट हासिल करके अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ दिया। दूसरे स्थान पर रहे वकील को 26 वोट मिले। आधिकारिक रिकॉर्ड में एक ब्रिटिश अधिकारी ने इस चुनावी मुकाबले को ‘अपेक्षाओं के विपरीत’ बताया था। इस जीत के साथ माजिद देश में सर्वोच्च कानून बनाने वाली संस्था के लिए चुने गए भारतीयों के एक चुनिंदा समूह में शामिल हो गए थे।1920 के चुनाव को भारत में डायरेक्ट इलेक्शन का प्रारंभिक बिंदु माना जाता है। उस समय तक औपनिवेशिक नीति विधायिका के लिए कुछ शिक्षित भारतीयों का चयन करती थी और उनके जरिए आम जनता की जरूरतों को समझने की कोशिश करती थी।लेकिन, बीतते समय के साथ अंग्रेजी सरकार के लिए विधायिका में आम जनता के प्रतिनिधित्व के सवाल को नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा था। औपनिवेशिक प्रशासकों ने 1909 में सीमित चुनावों के माध्यम से भारतीय सदस्यों की संख्या बढ़ाकर इसका जवाब दिया था। अंग्रेजों का एक विवादास्पद उपाय मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र आवंटित करना था।मोंटागु-चेम्सफोर्ड सुधार ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा था? भारतीय संवैधानिक सुधार 1918, जिसे मोंटागु-चेम्सफोर्ड सुधार के नाम से जाना जाता है, उसने 1909 की चुनाव प्रक्रिया की कमियों पर प्रकाश डाला था। रिपोर्ट में कहा गया था, “वर्तमान में आम मतदाता शायद ही चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा हैं। लगभग सभी को विशेष वर्गों या हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए डिज़ाइन किया गया है और इसमें बहुत कम व्यक्ति शामिल हैं। जो लोग मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करते हैं उनका उद्देश्य काफी हद तक समावेशी होना था लेकिन वे भी कुछ सौ मतदाताओं तक ही सीमित हैं।”मोंटागु-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट ने दो सदनों के साथ एक राष्ट्रीय विधायिका स्थापित करने की सिफारिश की। इस कानून बनाने वाली संस्था के एक सदन में जनता द्वारा सीधे निर्वाचित सदस्य होंगे। रिपोर्ट में निर्वाचित सदस्यों के साथ राज्य स्तर पर विधानमंडल स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया है।...more4minPlay
April 07, 2024लोकसभा चुनाव: जब पत्नी के लिए टिकट मांग रहे थे हेमवती नंदन बहुगुणा, भड़क गए थे चरण सिंह, आडवाणी ने चंद्रशेखर से कहा था- अब आप ही मनाइए |यह आपातकाल के बाद का पहला चुनाव (1977) था। तमाम नेता जेल में बंद रहे थे। दिवंगत प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी उनमें से एक थे। जब वह जेल से छूटे तो एक राजनीतिक पार्टी बनाने की चर्चा जोरों पर थी। कांग्रेस के कई बड़े नेता पार्टी छोड़ने के लिए तैयार थे। जयप्रकाश (जेपी) ने कांग्रेस (संगठन), समाजवादी, जनसंघ और कुछ अन्य लोगों को लेकर पार्टी बनाने की बात की थी . सुनें पूरा किस्सा....more4minPlay
April 07, 2024Taiwan Earthquake News: ताइवान में क्यों आते हैं इतने भूकंप, ये रही असली वजह | पर्दे की बात | 7.April| 4 PMताइवान में बुधवार यानी कि 3 अप्रैल को भयानक भूकंप आता है जिससे वहां की पूरी धरती हिल जाती है.. भूकंप के चलते कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं जिसके बाद पूरे इलाके में ट्रेन और बिजली जैसी आम सुविधाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई. बता दें कि भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.2 मापी गई. बताया जा रहा है कि अभी तब भूकंप के कारण 1 व्यक्ति की मौत हो गई और लगभग 50 लोग इसके चलते घायल हो गए...more4minPlay
April 07, 2024मजब चूड़ी बेचने वाले और हलवाई के बीच हुआ चुनावी मुकाबला, अंग्रेजों ने उड़ाया मजाक लेकिन परिणाम देख उड़ गए होश | सुर्खियां | 7.APRIL | 3 PM1920 में दिल्ली निवासी अब्दुल माजिद ब्रिटिश सरकार की नज़र में आये। वह ऐसे व्यक्ति थे जिनका प्रशासन के रडार पर आना सामान्य बात नहीं थी। माजिद की मिठाई की दुकान थी। उन्हें कुछ लोग हलवाई भी कहते थे।माजिद ब्रिटिश सरकार की नजर में कैसे आ गए थे? दरअसल, माजिद ने नवंबर 1920 के चुनाव में नामांकन पत्र दाखिल किया था। उनके विरोध में कुछ वकील और एक चूड़ी बेचने वाला खड़ा था। सरकार ने पहले तो माजिद और चूड़ी विक्रेता की उम्मीदवारी को गंभीरता से नहीं लिया।लेकिन जब परिणाम आए तो ब्रिटिश सरकार के होश फाख्ता हो गए। माजिद ने 288 वोट हासिल करके अपने प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ दिया। दूसरे स्थान पर रहे वकील को 26 वोट मिले। आधिकारिक रिकॉर्ड में एक ब्रिटिश अधिकारी ने इस चुनावी मुकाबले को ‘अपेक्षाओं के विपरीत’ बताया था। इस जीत के साथ माजिद देश में सर्वोच्च कानून बनाने वाली संस्था के लिए चुने गए भारतीयों के एक चुनिंदा समूह में शामिल हो गए थे।1920 के चुनाव को भारत में डायरेक्ट इलेक्शन का प्रारंभिक बिंदु माना जाता है। उस समय तक औपनिवेशिक नीति विधायिका के लिए कुछ शिक्षित भारतीयों का चयन करती थी और उनके जरिए आम जनता की जरूरतों को समझने की कोशिश करती थी।लेकिन, बीतते समय के साथ अंग्रेजी सरकार के लिए विधायिका में आम जनता के प्रतिनिधित्व के सवाल को नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा था। औपनिवेशिक प्रशासकों ने 1909 में सीमित चुनावों के माध्यम से भारतीय सदस्यों की संख्या बढ़ाकर इसका जवाब दिया था। अंग्रेजों का एक विवादास्पद उपाय मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र आवंटित करना था।मोंटागु-चेम्सफोर्ड सुधार ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा था? भारतीय संवैधानिक सुधार 1918, जिसे मोंटागु-चेम्सफोर्ड सुधार के नाम से जाना जाता है, उसने 1909 की चुनाव प्रक्रिया की कमियों पर प्रकाश डाला था।...more4minPlay
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