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हालिया कुछेक महीनों में सरकार के कई फैसलों से लोगों के बीच उनके प्रति विश्वास कुछ कम हुआ है। कृषि कानूनों को लेकर किसानों का असंतोष भी उनमें से एक है। यदि सभी वर्गों को भरोसे में लेकर काम करने की रणनीति बनाई जाए तो कई अनावश्यक गतिरोधों से बचा जा सकता है। मीडियाभारती.नेट से बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार विनीत सिंह बता रहे हैं कि कैसे इन ऊहापोह-भरी स्थितियों से बचा जाय...
निजता के नाम पर रिश्तों में दूरी बनाने से होने वाले नुकसानों का जिक्र कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार केशव चतुर्वेदी...
भोजपुरी साहित्य की परंपरा संत कबीर दास, दरिया दास व तुलसी दास से लेकर भिखारी ठाकुर की रचनाओं तक विस्तारित है। माना जाता है कि संस्कृत की साक्षात पुत्री है भोजपुरी भाषा...। साहित्य समालोचक प्रमोद कुमार पांडेय बता रहे हैं, भोजपुरी भाषा के उद्गम की कहानी...
बीते कई राजनीतिक और सामाजिक प्रकरणों में रिपोर्टिंग से ऐसा लगने लगा है कि मीडिया अपनी मारक क्षमता कहीं खो बैठा है। मीडिया के सुर, लय और ताल के खो जाने से खिन्न ब्रज खंडेलवाल बता रहे हैं इसकी वजह...
कोरोना काल में, हालांकि, घरेलू निवेश करने की बात थोड़ी अटपटी तो लगती है लेकिन सतत छोटा निवेश किसी भी घर की अर्थव्यवस्था का एक अहम पहलू है। ऐसे समय में जब आमदनी कम हुई है, नौकरियां छूट रही हैं, फिर भी, छोटे-छोटे निवेश के जरिए इस प्रक्रिया को कैसे जारी रखा जा सकता है? इसी तरह के कई सवालों पर वित्त नियोजक अभिनव गुप्ता से बात कर रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार...
किसानों के संघर्ष की मुख्य वजह बना न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी आखिर है क्या? बहुत ही आसान भाषा में बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार प्रिय रंजन झा...
किसान सड़कों पर उतरकर नए कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं। लेकिन, ये पंजाब के किसान हैं..., या पंजाब की सीमा से लगे हरियाणा और कुछ दूसरे इलाकों के...। यूपी, बिहार, महाराष्ट्र या कर्नाटक के किसान इस तरह का विरोध नहीं कर रहे हैं। क्यों नहीं कर रहे हैं, यह सवाल है। क्या पंजाब के किसान नए कृषि कानूनों को समझ नहीं पा रहे हैं? इसके विपरीत, केंद्र सरकार विरोध कर रहे इन किसानों को क्यों नहीं समझा पा रही है? एमएसपी को कानूनी रूप से अनिवार्य करने में क्या अड़चन है? क्या किसानों की आड़ में नेतागिरी हो रही है? असली समस्या क्या है? इसका हल क्या है? ऐसे ही कई सवालों पर वरिष्ठ पत्रकार प्रियरंजन झा के साथ बात कर रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार ...
यूपी, मध्य प्रदेश और अब हरियाणा में भी सरकारों ने लव जिहाद पर कानून बनाए जाने के संकेत दे दिए हैं। कानून बन भी जाएंगे, लेकिन क्या वाकई लव जिहाद जैसा कुछ है भी या यह बीजेपी के खुराफाती दिमाग की महज उपज मात्र है? हाल ही में कुछ घटनाएं ऐसी भी हुईं जिनमें हिंदू वधू और मुस्लिम वरों के रिश्ते टूटे हैं लेकिन सामाजिक जमीन पर ये घटनाएं लव जिहाद के दायरे में आती भी हैं या नहीं...? साथ ही, क्या अपनी पहचान छुपाकर रिश्ते बनाने के मामलों के पीछे लव जिहाद ही है? ऐसे ही कई सवालों पर वरिष्ठ पत्रकार केशव चतुर्वेदी से बात कर रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार ...
बिहार चुनावों के परिणाम हमारे सामने आ चुके हैं... और, जैसे कि पिछले कई बार से एक्जिट पोल के नतीजे लगातार गलत आ रहे हैं, इस बार भी गलत ही साबित हुए। तो, क्या अब वक्त नहीं आ गया है कि एक्जिट पोल की इस 'बेवकूफाना' अवधारणा को उठाकर डिब्बे में बंद करके कहीं रख दिया जाए…? एक्जिट पोल की प्रासंगिकता और इससे जुड़े कई दूसरे सवालों पर मीडिया आलोचक और वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल से बात कर रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार ...
बिहार में चुनावों के परिणाम आ चुके हैं। अब बिहार में राजनीतिक माहौल कैसा रहेगा और उसका केंद्र की राजनीति पर क्या असर पड़ने वाला है? इन्हीं सब बातों पर वरिष्ठ पत्रकार बिपिन तिवारी से बात कर रहे हैं मीडियाभारती.नेट के संपादक धर्मेंद्र कुमार ...
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