तू अब दास नहीं, परन्तु पुत्र है । यह शब्द का अर्थ है, पुत्र की स्थिति में रखना है । लेपालकपन की एक ही शर्त है, और वह है, मसीह में बने रहना और उसके साथ एकता। पुनर्जीवन, दोषमुक्ति और लेपालकपन में भेद स्पष्ट किया गया है। लेपालकपन की शर्त बता दिया है। लेपालक हो जाने का चिन्ह बताया है। लेपालकपन की सात आशीषें इस पॉडकास्ट में बताया है।