Naami Giraami - Podcast on Famous personalities from India and around the world

Naami Giraami - Podcast on Famous personalities from India and around the world

By AajtakNewsDaily News
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Naami Giraami - Podcast on Famous personalities from India and around the world episodes

  • राहत इंदौरी: 'वो मुझको मुर्दा समझ रहा है, उससे कहो मैं मरा नहीं हूँ'
    भरोसे से परे है कि राहत इंदौरी अब नहीं रहे. इंदौर के थे और अपनी मिट्टी से इतना प्यार करते थे कि राहतउल्ला कुरैशी की जगह शहर के नाम को अपना नाम बना लिया और हो गए राहत इन्दौरी. समकालीन शायरों में कई नाम ऐसे हैं जो जदीद शायरी को उसके उरूज तक ले गए, राहत इन्दौरी भी उनमें से एक थे. जब वो शेर पढ़ते थे तो लोग देर तक खड़े होकर तालियां बजाते रहते. मुशायरों में उनके प्रति दीवानगी देखते बनती थी. मंच पर कैसे थे उनकी बादशाहत के जलवे, सुनिये आज तक रेडियो के पॉडकास्ट में अंजुम शर्मा के साथ.
    18 min
  • जब मनोहर श्याम जोशी ने बताया स्क्रिप्ट राइटिंग का एक आसान सा फॉर्मूला
    मनोहर श्याम जोशी हिंदी लेखन की दुनिया में ऐसी शख्सियत में से थे जिनके बारे में कहा जा सकता है कि एक शख़्स आख़िर क्या-क्या हो सकता है. उपन्यासकार, व्यंग्यकार, प्रखर पत्रकार, धारावाहिक लेखक, फ़िल्म पटकथा लेखक, एक डबिंग आर्टिस्ट और भी बहुत कुछ. कह सकते हैं कि एक मनोहर श्याम जोशी में कई मनोहर श्याम जोशी थे, आप जिसे जानना चाहें अपनी रुचि के हिसाब से जान सकते हैं. आज की इस प्रस्तुति में उन्हें आप से थोड़ा बहुत परिचित कराने की कोशिश कर रहे हैं अंजुम शर्मा.
    12 min
  • जब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा 'अमर सिंह सबकी हिस्ट्री शीट खोल देंगे'
    जिस समय अमर सिंह समाजवादी पार्टी से जुड़े थे तो सपा वैसी ग्लैमराइज़्ड पार्टी नहीं थी जैसी धीरे-धीरे होती चली गई. लोग कहते हैं, यह चमक धमक अमर सिंह की ही देन थी. धीरे-धीरे उनका क़द पार्टी में इतना बड़ा हो गया था कि वो जिस पर हाथ रख दें उसे मुलायम सिंह का ही निर्णय माना जाता. अमर सिंह से जब भी कोई सवाल पूछा जाता तो वो बेहद फ़िल्मी अंदाज़ में उसका जवाब देते या कोई शेर कह देते. यह उनका अपना अंदाज़ था, अपना तेवर था. लेकिन अमर सिंह का राजनीति में योगदान क्या रहा? क्यों उनकी छवि उन नेताओं जैसी नहीं बन पाई जिन्हें पीढ़ियां आदर्श मानती आई हैं, आज तक रेडियो के इस पॉडकास्ट में बता रहे हैं अंजुम शर्मा
    11 min
  • फ़ोन की वह घंटी जो बन गई डॉ. कलाम के जीवन का टर्निंग पॉइंट
    भारत के 11वें राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन किसी के लिए भी प्रेरणा हो सकता है. रामेश्वरम के मछुवारे परिवार में पैदा हुआ एक बच्चा मदरसे में पढ़ाई करता है, अख़बार बेचता है, धीरे-धीरे अपनी मेहनत के दम पर ग्रेजुएट होता है, इसरो और डीआरडीओ को नई ऊंचाईयां देता है, भारत के वैज्ञानिक आकाश को समृद्ध करता है और एक दिन देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की शोभा बढ़ाता है. यह सबकुछ इतना आसान नहीं था, यह सपनों के सच होने की एक पूरी दास्तान है जिसके पीछे अथाह परिश्रम और नवीन सोच की दुनिया काम करती है. आज तक रेडियो के इस पॉडकास्ट में सुनिये डॉ. कलाम के जीवन के कुछ दिलचस्प किस्से, अंजुम शर्मा के साथ
    11 min
  • कम्प्यूटर को मात देने वाली शकुंतला देवी बिना कलम-काग़ज़ छुए कैसे देती थीं जवाब
    शकुंतला देवी जब 3 साल की थीं तब से गणित के सवाल हल करने लगीं थीं. धीरे-धीरे उनके पड़ोसी अपने बच्चों का होमवर्क करवाने, ट्यूशन के लिए उनके पास आते गए. अंकों के प्रति उनके भीतर प्रेम और लगाव जागने लगा और वह धीरे-धीरे गुणा, भाग, क्यूब रूट्स और बाकी सवाल हल करने में एक्सपर्ट होती गईं. वे मात्र 15 से 30 सेकंड में बड़े से बड़ा अंक देखते ही उसे गुणा कर देतीं और उसका स्क्वायर रूट, क्यूब रूट निकाल देतीं. वो कैलकुलेटर से भी तेज थीं, कम्प्यूटर को चैलेंज दे रहीं थीं. वो कौन सी संख्या थी जिसे उन्होंने कम्प्यूटर से तेज़ हल किया था, सुनिये आज तक रेडियो के इस पॉडकास्ट में अंजुम शर्मा के साथ
    10 min
  • अरुणा आसफ़ अली: आवारागर्दी के आरोप में जिन्हें अंग्रेज़ों ने भेजा था जेल
    दिल्ली में पत्रकारिता का जाना माना संस्थान है, IIMC. वो जिस मार्ग पर है उसका नाम है अरुण आसफ़ अली मार्ग. किसी के नाम पर देश की राजधानी की एक सड़क का नाम रखा जाना यह छोटी बात नहीं है. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं को जब अंग्रेजी हुकूमत ने जेल में डाल दिया था. तब अरुणा आसफ़ अली अदम्य साहस का परिचय देते हुए आगे आती हैं. आंदोलन में जोश भरने के लिए ग्वालिया टैंक के मैदान तक पहुंचती है और तिरंगा फ़हराती है. आज तक रेडियो के इस पॉडकास्ट में उनकी शख़सियत से जुड़ी तमाम बातें बता रहे हैं अंजुम शर्मा.
    9 min
  • विलियम हैना ने कैसे बनाए थे टॉम एंड जैरी जैसे कार्टून
    विलियम हैना ने पिछली सदी के बच्चों से लेकर बड़ों तक के भीतर बचपन को ज़िंदा रखने का काम किया है. उनकी वजह से एनिमेशन इंडस्ट्री को नई पहचान मिली और ऐसे-ऐसे कैरेक्टर उन्होंने हमें दिए कि आज तक वो न केवल टीवी पर दिखाए जाते हैं बल्कि लोगों की पहली पसंद भी बने हुए हैं. 1940 में हैना और बारबरा की जोड़ी ने पुस गेट्स द बूट्स नाम का कार्टून बनाया. कार्टून को ऑस्कर के लिए नॉमिनेट किया गया लेकिन हैना और बारबरा के सुपरवाइजर को चूहे-बिल्ली वाला कॉन्सेप्ट पसन्द नहीं आया. वो इसे हटाना चाहते थे लेकिन फिर कैसे बन गया यह कार्टून दुनिया भर में एक मानक? जानिए इस पॉडकास्ट में अंजुम शर्मा के साथ.
    9 min
  • अंधेरे और उजाले का अनूठा शोमैन थे गुरुदत्त
    जब पूरी दुनिया 50 mm का लेंस शूट के लिए काम में लेती थी. गुरुदत्त ने वी. के. मूर्ति के साथ मिलकर 75 mm का लेंस से शूट किया. कभी-कभी तो पूरे फ्रेम में चेहरा ही नज़र आता कलाकार का. उनके कैमरे की एप्रोच हमेशा ह्युमनिस्टिक ही रही, कहानियां भी इंसानी संवेदनाओं के इर्द-गिर्द मंडराती हुई. गुरुदत्त के इस पहलू से रूबरू करवा रही हैं माधुरी.
    10 min
  • संजीव कुमार ने क्यों किया था शादी न करने का फ़ैसला?
    संजीव कुमार हिंदी सिनेमा के अभिनेता नहीं थे बल्कि अभिनय का संस्थान थे. अपने किरदार को घुट्टी की तरह घोल कर पी जाना यह प्रतिभा बहुत कम लोगों के पास होती है. फ़िल्म 'नया दिन नई रात' में संजीव कुमार ने 9 किरदार निभाये, यह ऑफ़र तो हुई थी दिलीप कुमार को लेकिन संजीव की झोली में कैसे चली गयी? संजीव कुमार की ज़िदगी से जुड़े ऐसे ही तमाम क़िस्से आज तक रेडियो के इस पॉडकास्ट में लेकर आए हैं अंजुम शर्मा.
    15 min
  • स्वामी विवेकानंद के संघर्ष के दिनों में किसने दिया था उनका साथ?
    रामकृष्ण परमहंस ने प्रशिक्षित किया और नरेंद्रनाथ से वो बन गए, विवेकानंद. परमहंस ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया और भगवा वस्त्र पहनने के लिए दिए थे. लेकिन उनके सिर पर जो पगड़ी बंधी है उसके पीछे की कहानी क्या है, सुनिए आजतक रेडियो के इस पॉडकास्ट में अंजुम शर्मा के साथ.
    11 min

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