१३वे दिन के कुरुक्षेत्र का युद्ध बहुत विशेष था। अर्जुन संपतकों और राजा सुशर्मा से लड़ने चले गए। इधर द्रोण ने बंद कमल के फूल जैसे चक्रव्यूह की रचना की। द्रोण पांडवों की सेना का संहार कर रहे थे पर भीम, सात्यकी, दृष्टीदुमं , राजा विराट, और बहुत सारे पांडवों के योद्धा मिलकर भी इस चक्रव्यूह को तोड़ नहीं पा रहे थे। तब युधिष्ठिर ने अभिमन्यु को बुलाया और उसे चक्रव्यूह को तोड़ने कहा। अभिमन्यु ने कहा कि मैं चक्रव्यूह तोड़ना जनता हूँ पर उससे बाहर आने की जरूरत पड़े तो मुझे नहीं आता है। युधिष्ठिर ने दिलासा दिलाया कि हम तुम्हारे साथ रहेंगे और तुम्हारी रक्षा करेंगे।