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"तो बस यही है दीवानगी कि खुद में मगन रहना, झूमते रहना, खुश रहना, राते रहना, दिन बजा, बस हँसते रहना, सबको हंसाते रहना, न कोई, निष्पक्षता, न कोई भेदभाव, बस एकदम मौज में झूमना। ये है दीवानी की खुद की। तो हमने अब तक देखा दीवानी, वो तो थी खुद में दीवानगी, लेकिन जब अब दूसरी तरफ से देखें तो वो है किसी की प्यार में दीवानी, उसकी हरकतें, उसकी बातों से, उसकी आंखों से हर 1 चीज में दीवानी हो जाती है।"