एक ही पल में सब कुछ गायब हो गया कलेक्टर साहब बुत बनकर वही बेठे थे समझ नहीं आ रहा था जो भी अभी उन्हें दिख रहा था वो सच था या किसी ने उनकी आखों के सामने कोई पर्दा लगा रखा था
लेकिन ना ही मन्दिर मे मुर्ति है ओर ना ही गाँव मे कोई इन्सान चारो तरफ बस एक सन्नाटा ओर जब कोई इस वीराने मे जाता है तो उसे ऐसा महसूस होता है जैसे वो अकेला नही
कौरवो और पाडवो के बीच इस दुनिया का सबसे बड़ा युद्ध चल रहा था। करीब पचास लाख लोगो ने इस युद्ध मे भाग लिया था। हर रोज हजारो सैनिक मारे जाते दूसरी तरफ एक शख्स ऐसा भी था जो हर रोज उतना ही खाना बनाता की आखिरी सैनिक के खाने के बाद खाना खत्म हो जाता ये किसी चमत्कार से कम नही था। सभी के मन मे यही सवाल था। कि भला खाना बनाने वाले को ये कैसे पता लग जाता है। की आज युद्ध मे कितने सैनिक मारे जाएगे।
इतिहास को छू कर आने वाली हवा में एक बार साँस ले कर देखिए, उस हवा में घुली वीरता की महक से आपका सीना गौरवान्वित हो उठेगा. भले ही हममें से कई लोग अपने देश की माटी में सने अपने पूर्वजों के लहू की गंध ना ले पाए हों, किन्तु इतिहास ने आज भी भारत माँ के उन सपूतों की वीर गाथाओं को अपने सीने में सहेज कर रखा है।